नरसिंहगढ़: नरसिंहगढ़ ब्लॉक के 9 शासकीय स्कूलों में मरम्मत और रंग-रोहन के नाम पर 40 लाख 50 हजार रुपये के सरकारी बजट को जिस तरह ठिकाने लगाया गया है, उसने अब एक बड़े घोटाले की आहट दे दी है। हैरानी की बात यह है कि स्कूलों की सूरत बदलने के नाम पर हुई इस 'लीपापोती' की जांच तो शुरू हुई, लेकिन उसकी रफ्तार और निष्पक्षता पर अब ग्रामीण और अभिभावक ही सवाल उठा रहे हैं।
मरम्मत या महज खानापूर्ति?
बकानी, सोनकच्छ, पीपलखेड़ा, लसुडिया जागीर, खानपुरा, कसरोद, सीका तुर्कीपुरा, झाड़ला और गनियारी के स्कूलों में सीसी निर्माण, ड्रेनेज और 'डैम्प प्रूफिंग' (नमी रोकने का काम) के दावे किए गए हैं। ग्राउंड जीरो से मिल रही जानकारी के मुताबिक अधिकांश स्कूलों में नमी रोकने का काम केवल कागजों पर या बेहद घटिया स्तर का हुआ है। विभाग के पास अपने इंजीनियर होने के बावजूद, मूल्यांकन के लिए प्राइवेट इंजीनियर की सेवाएं ली गईं, जिसने मिलीभगत के शक को पुख्ता कर दिया है।
आरोपी ही जज!
एसडीएम ने 6 अप्रैल को जांच के आदेश देते हुए दो दिन में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट ठंडे बस्ते में है। विवाद की मुख्य वजह जांच कमेटी का गठन है। जांच टीम में उसी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को शामिल किया गया है, जिनकी देखरेख में यह पूरा काम हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि जिस अधिकारी की निगरानी में बजट खर्च हुआ, वह खुद के खिलाफ रिपोर्ट कैसे दे सकता है?
स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग और ठेकेदार के बीच तगड़ी सेटिंग है। शासकीय राशि की इस 'बंदरबांट' को लेकर अब मांग उठ रही है कि किसी स्वतंत्र एजेंसी या जिले के बाहर की टीम से इसकी जांच कराई जाए। वही मामले को लेकर एसडीएम सुशील कुमार का कहना है कि जांच टीम गठित कर दी गई है और मामले की पड़ताल चल रही है।