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सरकारी स्कूलों के 106 वोकेशनल ट्रेनर्स की कलेक्टर से गुहार, मानदेय से नौकरी की सुरक्षा तक उठाईं ये मांगें

सरकारी स्कूलों के 106 वोकेशनल ट्रेनर्स की कलेक्टर से गुहार, मानदेय से नौकरी की सुरक्षा तक उठाईं ये मांगें

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को कौशल और रोजगार से जुड़ी शिक्षा देने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। जिले के 53 सरकारी स्कूलों में कार्यरत 106 व्यावसायिक प्रशिक्षक सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

प्रशिक्षकों ने कहा कि वे लंबे समय से विद्यार्थियों को अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार कर रहे हैं, लेकिन उनकी खुद की सेवा व्यवस्था कई समस्याओं से गुजर रही है। मानदेय में बढ़ोतरी, बकाया भुगतान, नौकरी की सुरक्षा और बेहतर सेवा शर्तों समेत कई मांगों को लेकर उन्होंने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की अपील की है।

2014 से स्कूलों में दे रहे कौशल आधारित प्रशिक्षण

सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था वर्ष 2014 से संचालित की जा रही है। इसके तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़े कौशल सिखाने पर जोर दिया जाता है।

बलौदाबाजार जिले में भी व्यावसायिक प्रशिक्षक विद्यार्थियों को ब्यूटी एंड वेलनेस, आईटी, ऑटोमोबाइल, एग्रीकल्चर, हेल्थ केयर, रिटेल, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण दे रहे हैं।

प्रशिक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कौशल और रोजगारपरक शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ऐसे में इस व्यवस्था को संचालित करने वाले प्रशिक्षकों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।

₹38,100 मानदेय और हर साल वेतन वृद्धि की मांग

प्रशिक्षकों ने अपने ज्ञापन में मानदेय बढ़ाने की प्रमुख मांग रखी है। उन्होंने हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर ₹38,100 प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने की मांग की है।

इसके साथ ही हर साल नियमित मानदेय वृद्धि लागू करने की भी मांग की गई है। प्रशिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से जिम्मेदारी निभाने के बावजूद वर्तमान मानदेय उनके कार्य और दायित्व के अनुपात में पर्याप्त नहीं है।

निजी एजेंसी की व्यवस्था खत्म करने की मांग

व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने सेवा सुरक्षा को भी अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है। उनका कहना है कि निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित मौजूदा व्यवस्था के कारण उनकी नौकरी को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।

उन्होंने प्रशिक्षकों को विभागीय व्यवस्था में शामिल करने और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही नई निविदा जारी होने की स्थिति में पहले से कार्यरत प्रशिक्षकों को प्राथमिकता देने की मांग भी रखी गई है।

प्रशिक्षकों का तर्क है कि वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को केवल व्यवस्था बदलने के कारण नौकरी से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

1,000 रुपये की बढ़ोतरी का एरियर भी मांगा

ज्ञापन में लंबित भुगतान से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए गए। प्रशिक्षकों ने PAB 2025-26 के तहत स्वीकृत 1,000 रुपये मासिक मानदेय वृद्धि की लंबित राशि का भुगतान करने की मांग की है।

इसके तहत 12,000 रुपये एरियर्स दिए जाने की मांग रखी गई है। इसके अलावा करीब 1,029 प्रशिक्षकों के लंबित मानदेय और जून महीने के भुगतान का जल्द निपटारा करने की मांग भी की गई है।

हेल्थ केयर के अनुभवी प्रशिक्षकों के लिए अलग मांग

प्रशिक्षकों ने हेल्थ केयर ट्रेड में काम कर रहे अनुभवी कर्मचारियों के मानदेय को लेकर भी मांग रखी है। ज्ञापन के अनुसार, 121 अनुभवी हेल्थ केयर व्यावसायिक प्रशिक्षकों का मानदेय ₹23,000 प्रतिमाह किए जाने की मांग की गई है।

इसके अलावा लक्ष्य कंपनी द्वारा सेवा से हटाए गए चार प्रशिक्षकों को दोबारा काम पर लेने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी गई है।

छुट्टी और समय पर भुगतान की भी मांग

व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने सेवा शर्तों को बेहतर बनाने के लिए छुट्टियों से जुड़ी मांगें भी रखी हैं। उन्होंने हर वर्ष 20 दिन आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश और महिला प्रशिक्षकों के लिए मातृत्व अवकाश की व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

प्रशिक्षकों ने हर महीने निर्धारित समय पर मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही है। उनका कहना है कि भुगतान में होने वाली देरी से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

गैर-व्यावसायिक काम नहीं कराने की मांग

प्रशिक्षकों ने अपने निर्धारित कार्यों के अलावा दूसरे गैर-व्यावसायिक कार्यों में नहीं लगाए जाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति विद्यार्थियों को व्यावसायिक और कौशल आधारित प्रशिक्षण देने के लिए हुई है, इसलिए उन्हें इसी जिम्मेदारी तक सीमित रखा जाना चाहिए।

इसके अलावा दूसरे राज्यों की व्यवस्था का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में भी व्यावसायिक प्रशिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश देने की मांग की गई है।


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