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वीरेंद्र तोमर दोषमुक्त: 2013 के गोलीकांड में 12 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

वीरेंद्र तोमर दोषमुक्त: 2013 के गोलीकांड में 12 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

राजधानी रायपुर में साल 2013 में हुए एक चर्चित गोलीकांड मामले में आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद कोर्ट ने मुख्य आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले में पर्याप्त और ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके, जिसके कारण आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया।

यह मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र के चौरसिया कॉलोनी का है, जहां एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। घटना की शुरुआत एक फर्नीचर के लेन-देन से जुड़ी थी। बताया जाता है कि एक फर्नीचर व्यवसायी को शादी के लिए सामान बनाने का ऑर्डर दिया गया था। कुछ रकम एडवांस दी गई थी, जबकि बाकी भुगतान समय पर नहीं किया गया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ।

13 अगस्त 2013 को विवाद उस समय बढ़ गया, जब फर्नीचर व्यवसायी अपने साथियों के साथ सामान वापस लेने आरोपी के घर पहुंचा। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि बात मारपीट तक पहुंच गई।

आरोप था कि इसी दौरान गोली चलाई गई, जिसमें एक व्यक्ति को गोली लग गई और उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए, गवाहों के बयान लिए और कथित हथियार भी बरामद किया। इसके बाद मामला अदालत में पेश किया गया और लंबे समय तक इसकी सुनवाई चलती रही।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी गवाहों के बयान, दस्तावेज और अन्य सबूतों का गहराई से परीक्षण किया। लेकिन कोर्ट ने पाया कि प्रस्तुत किए गए साक्ष्य मजबूत नहीं थे। कई गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते थे, जिससे मामले की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।

इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका है। ऐसे में आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।

इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी आपराधिक केस में सजा के लिए ठोस और स्पष्ट सबूत होना बेहद जरूरी है। केवल आरोप या शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

गौरतलब है कि इस मामले से जुड़ा आरोपी बाद के वर्षों में अन्य मामलों में भी चर्चा में रहा है और उसे कुछ समय पहले गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि इस पुराने गोलीकांड में अदालत का फैसला उसके पक्ष में आया है।


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