नागदा: उज्जैन जिले का नागदा इस समय एक गंभीर संकट की दहलीज पर खड़ा है। शहर के लगभग हर वार्ड में पिछले एक सप्ताह से पीले, मटमैले और बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि स्थानीय लोग इसकी तुलना इंदौर के 'भागीरथपुरा' कांड से करने लगे हैं। दूषित पानी के सेवन से नागरिकों में पेट दर्द और संक्रमण की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
आखिर कहां है लीकेज?
हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका के फिल्टर प्लांट पर पानी पूरी तरह साफ नजर आता है, लेकिन लोगों के घरों तक पहुंचते-पहुंचते यह पीला और झागदार हो जाता है। पानी में कचरा और तेज बदबू इस बात का संकेत दे रही है कि शहर की राइजिंग या डिस्ट्रीब्यूशन लाइन में कहीं न कहीं गंदे नाले का पानी मिक्स हो रहा है। वही नपा अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वे टंकियों और लाइनों की सफाई करवा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक वे इस 'जहरीले' पानी के स्रोत का पता लगाने में नाकाम रहे हैं।
जिम्मेदारों की 'चुप्पी' बढ़ा आक्रोश
जब इस गंभीर मुद्दे पर नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने दूरभाष पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, जल विभाग के सभापति प्रकाश जैन ने स्वीकार किया कि वार्ड 36 समेत कई इलाकों में गंदा पानी आ रहा है और जल्द ही इस पर विचार किया जाएगा। हालांकि, 'विचार' के आश्वासन से जनता संतुष्ट नहीं है।
सोमवार का अल्टीमेटम
दूषित पानी की समस्या से शहर के बच्चे भी खासे नाराज हैं। बच्चों का एक समूह कल एसडीएम कार्यालय पहुंचकर इस समस्या की शिकायत दर्ज कराएगा। वहीं, वार्ड वासियों ने चेतावनी दी है कि यदि सोमवार तक स्वच्छ जल की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो शहरभर में उग्र धरना और आंदोलन शुरू किया जाएगा।