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MP STUDENTS SUICIDES: MP में मौतों का सिलसिला शुरू, परीक्षा परिणाम आने के बाद 10वीं-12वीं के कई स्टूडेंट्स ने दी जान

MP STUDENTS SUICIDES: MP में मौतों का सिलसिला शुरू, परीक्षा परिणाम आने के बाद 10वीं-12वीं के कई स्टूडेंट्स ने दी जान

छतरपुर:  मध्य प्रदेश में नाबालिकों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया है। 10वीं -12वीं बोर्ड के नतीजे आने के बाद स्टूडेंट्स एक एक कर अपनी जान दे रहे है। परिणाम अच्छा नहीं आने के चलते मुरैना में बीते दिन एक छात्र ने कथित रूप से गोली मारकर अपनी जान ले ली। तो वही बिना में आज 12वीं के छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इतना ही नहीं छतरपुर में भी 12वीं की छात्रा ने परीक्षा में फेल होने के बाद जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। 

इलाज के दौरान छात्रा की हुई मौत

पहली घटना छतरपुर की है। जहां सुनाटी गांव की 17 वर्षीय छात्रा ने परीक्षा में असफल होने के बाद जहरीला पदार्थ खा कर अपनी जान दे दी। हालांकि समय रहते परिजन उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। जहां इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई। 

जहरीला पदार्थ खाकर दी जान

जानकारी के अनुसार, सुनाटी निवासी शिवानी अहिरवार (17) पुत्री सुरेश अहिरवार ने हाल ही में कक्षा 12वीं की परीक्षा दी थी। बुधवार को जब परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तो वह फेल हो गई। बताया जा रहा है कि रिजल्ट आने के कुछ समय बाद ही छात्रा ने तनाव में आकर दोपहर के समय जहरीला पदार्थ खा लिया। जिससे उसकी मौत हो गई। वही बेटी की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। 

देसी कट्टे से खुद को मारी गोली

दूसरी घटना मुरैना की है। जहां 12वीं की परीक्षा में फेल होने के बाद ऋतिक दंडोतिया (20) ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार, ऋतिक ने 12वीं की परीक्षा दी थी, लेकिन भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित में फेल हो गया। इस बात से आहत होकर उसने देसी कट्टे से खुद को गोली मार ली। 

सप्लीमेंट्री आने के बाद लगाई फांसी

इसके साथ ही तीसरी घटना बीना की है। जहां 12वीं के छात्र ने परीक्षा में सप्लीमेंट्री आने के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा  रहा है कि देर रात छात्र ने यह खौफनाक कदम उठाया। बेटे की मौत से परिवार में जहां मातम पसरा हुआ है। तो वही पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज मामले में आगे की जांच शुरू कर दी। घटना ग्राम किर्रोद की है। 

मानसिक दवाब बनी वजह

इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा परिणाम के बाद विद्यार्थियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में परिवार और समाज को बच्चों का हौसला बढ़ाना चाहिए, ताकि वे किसी भी असफलता को जीवन का अंत न समझें।

 


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