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चिकन बाजार में मंदी: मांग घटने से पोल्ट्री सेक्टर में बढ़ा संकट

चिकन बाजार में मंदी: मांग घटने से पोल्ट्री सेक्टर में बढ़ा संकट

अंतरराष्ट्रीय हालात और घरेलू परिस्थितियों के असर से अब प्रदेश के चिकन बाजार में साफ तौर पर मंदी देखने को मिल रही है। लगातार घटती मांग और सप्लाई में असंतुलन के कारण पोल्ट्री सेक्टर दबाव में आ गया है। इसका असर न सिर्फ कारोबारियों बल्कि उपभोक्ताओं और किसानों पर भी पड़ रहा है।

मांग घटने से बिगड़ा बाजार संतुलन

पहले जहां चिकन की खपत स्थिर बनी हुई थी, वहीं अब अचानक मांग में आई गिरावट ने पूरे बाजार का संतुलन बिगाड़ दिया है। रोजाना लाखों किलो चिकन की खपत होने वाला बाजार अब सुस्त पड़ गया है। खपत घटने से स्टॉक बढ़ रहा है और कारोबारियों के सामने इसे बेचने की चुनौती खड़ी हो गई है।

थोक और खुदरा कीमतों में बड़ा अंतर

मंदी का सबसे बड़ा असर कीमतों के अंतर में देखने को मिल रहा है। पोल्ट्री फार्म स्तर पर चिकन सस्ता हो गया है, लेकिन खुदरा बाजार में अभी भी दाम ऊंचे बने हुए हैं। इससे उपभोक्ता को राहत नहीं मिल रही, जबकि उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह असंतुलन बाजार की सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है।

होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर से घटती मांग

चिकन बाजार में मंदी की एक बड़ी वजह होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट्स से कम होती मांग है। गैस की कमी और बढ़ती लागत के कारण इन संस्थानों ने चिकन की खरीद कम कर दी है। इससे थोक बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें नीचे आ गईं।

उपभोक्ताओं की आदतों में बदलाव

बाजार की मंदी का एक कारण उपभोक्ताओं का बदलता व्यवहार भी है। लोग अब खर्च कम करने के लिए नॉनवेज फूड की खरीद सीमित कर रहे हैं। पहले जहां नियमित रूप से चिकन खरीदा जाता था, अब उसकी जगह कम आवृत्ति पर खरीदारी हो रही है।

किसानों और छोटे व्यापारियों पर दबाव

इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर छोटे पोल्ट्री फार्म संचालकों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। लागत बढ़ने और बिक्री घटने के कारण उनका मुनाफा घट गया है। कई छोटे व्यापारी अब नुकसान से बचने के लिए उत्पादन कम करने पर विचार कर रहे हैं।

आगे क्या होगी स्थिति?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाजार में मांग जल्द नहीं बढ़ी, तो यह मंदी और गहरी हो सकती है। इससे पोल्ट्री सेक्टर को उबरने में लंबा समय लग सकता है। फिलहाल कारोबारियों की नजर बाजार के स्थिर होने पर टिकी हुई है।

 

 


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