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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में दिन में तीन बार होगी प्रार्थना, आदेश पर गरमाई राजनीति

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में दिन में तीन बार होगी प्रार्थना, आदेश पर गरमाई राजनीति

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी सरकारी स्कूलों में दैनिक प्रार्थना व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार विद्यार्थियों को दिन में तीन अलग-अलग समय पर निर्धारित प्रार्थनाएं और मंत्रों का पाठ कराया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत सुबह स्कूल शुरू होने पर सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र सहित विभिन्न प्रार्थनाएं कराई जाएंगी। दोपहर में भोजन से पहले भोजन मंत्र और विद्यालय की छुट्टी के समय गायत्री मंत्र का पाठ अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, अनुशासन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से परिचय कराना है।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

सरकारी आदेश सामने आने के बाद प्रदेश में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकारी स्कूल किसी एक विचारधारा या धार्मिक परंपरा के नहीं होते, बल्कि यहां सभी धर्मों और समुदायों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को अनिवार्य बनाना शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने राज्य सरकार से इस आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

भाजपा का पलटवार

कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि गायत्री मंत्र और सरस्वती वंदना भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का हिस्सा हैं। भाजपा का तर्क है कि इन प्रार्थनाओं में किसी विशेष वर्ग के खिलाफ कोई भावना नहीं है, बल्कि इनमें विश्व कल्याण और सकारात्मक सोच का संदेश निहित है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कांग्रेस के विरोध को सनातन संस्कृति के प्रति विरोधी मानसिकता बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना गलत नहीं माना जा सकता।

16 जून से खुलेंगे प्रदेश के स्कूल

गर्मी की छुट्टियों के बाद प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूल 16 जून 2026 से खुलेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। स्कूल खुलने के साथ ही राज्यभर में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नए विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया जाएगा। पात्र छात्रों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और साइकिल वितरण की योजना भी लागू की जाएगी। इसके अलावा ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को दोबारा स्कूलों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। बोर्ड परीक्षाओं और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

क्या है विवाद का मुख्य कारण?

विवाद का केंद्र सरकारी स्कूलों में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रार्थनाओं को अनिवार्य बनाए जाने का फैसला है। एक पक्ष इसे भारतीय संस्कृति और नैतिक शिक्षा से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सरकारी शिक्षण संस्थानों की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति का हवाला देते हुए इस पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।




 


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