Congress Kisan Maha Chaupal : अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस ने भोपाल के जवाहर चौक पर किसान महापंचायत आयोजित कर रही है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भोपाल पहुंच चुके है।
किसानों से संवाद
महापंचायत में हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, किसान और महिलाएं मौजूद है। मंच पर पहुंचने के बाद दोनों नेता किसानों के साथ संवाद कर रहे है और ट्रेड डील को लेकर पार्टी की आपत्तियां सामने रख रहे है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
खड़गे को हल भेंट
कार्यक्रम के दौरान किसान कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रतीकात्मक रूप से हल भेंट किया गया।
उमंग सिंघार का बयान
उमंग सिंघार ने किसान महाचौपाल को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया गया और कर्ज माफी जैसे कदम उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि अमेरिका से अनाज और दूध का आयात बढ़ा तो देश के किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल पाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
जीतू पटवारी का आरोप
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले ही ट्रेड डील को लेकर आगाह किया था और नरेंद्र सरेंडर की बात कही थी। उनका दावा था कि यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच संतुलित रूप से नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत स्तर पर हुआ।
पटवारी ने नोटबंदी, कोरोना काल, जीएसटी, तीन कृषि कानूनों और चीन सीमा विवाद जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी मामलों में राहुल गांधी ने पहले ही सरकार को चेताया था। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि ट्रेड डील के प्रभाव को लेकर भी राहुल गांधी ने पहले से आशंका जताई थी और अब वही स्थिति सामने आ रही है।
प्रधानमंत्री अपने कमरे में छुप गए : राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिंदुस्तान के संसदीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब विपक्ष के नेता को सदन में बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की, उन्हें बार-बार रोका गया।
प्रधानमंत्री अपने कमरे में छुप गए
राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैने नरवरे जी की किताब का जिक्र किया, उन्होंने साफ लिखा है कि जब चीन के टैंक भारत की बॉर्डर के अंदर आ रहे हैं, तो राजनाथ सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया। अजीत डोभाल ने कोई जवाब नहीं दिया, एस जयशंकर ने भी कोई जवाब नहीं दिया। दो घंटे बाद फिर नरवरे जी ने राजनाथ सिंह से पूछा कि क्या ऑर्डर है? ये इसलिए पूछ रहे थे कि क्यों कि युद्ध का निर्णय प्रधानमंत्री को लेना होता है। चीन के टैंक अंदर आ रहे थे, आर्मी चीफ को कोई जवाब नहीं मिल सका। उस समय प्रधानमंत्री अपने कमरे में छुप गए, उन्होंने राजनाथ सिंह से कह दिया जो उचित लगे वो करें।
चीन घटनाक्रम पर बोले राहुल
उन्होंने बताया कि उन्होंने एक पुस्तक का हवाला देते हुए चीन से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करना चाहा, जिसमें कथित तौर पर सीमा पर चीनी टैंकों की गतिविधियों और उस समय सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। उनका दावा है कि उस समय संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद में इन मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं दी गई और इशारों के माध्यम से उन्हें बोलने से रोका गया।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि ट्रेड डील के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों से भारत और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही थी। उनके अनुसार, सरकार नहीं चाहती थी कि अमेरिकी कंपनियां सोयाबीन, कपास और मक्का जैसे कृषि उत्पाद भारत में बेच सकें, लेकिन अचानक परिस्थितियां बदलीं। उन्होंने दावा किया कि संसद में उन्हें बोलने से रोका गया, जबकि दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत कर समझौते को आगे बढ़ाया।
दबाव में की गई ट्रेड डील
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने कैबिनेट से व्यापक चर्चा किए बिना फैसला लिया और देश के टेक्सटाइल सेक्टर, किसानों और डेटा सुरक्षा से जुड़े हितों से समझौता किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी डेटा की सदी है और भारत के पास बड़ा डेटा संसाधन है, जिसे किसी भी समझौते में सावधानी से संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ मामलों और जांचों के दबाव में यह ट्रेड डील की गई। उनके मुताबिक, अमेरिका और अन्य देशों में चल रहे मामलों का असर इस निर्णय पर पड़ा। उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि यह समझौता देशहित में नहीं है तो उसे रद्द किया जाए।
डील का पड़ेगा असर
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि भारत को हर साल बड़े पैमाने पर अमेरिकी उत्पाद खरीदने पड़ेंगे, तो इसका असर घरेलू उद्योगों और फैक्ट्रियों पर पड़ेगा। अंत में उन्होंने सवाल उठाया कि इस समझौते के बदले देश को क्या ठोस लाभ मिला है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
ऐसा डरपोक प्रधानमंत्री नहीं देखा : मल्लिकार्जुन खड़गे
किसान चौपाल को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी ने जो कुछ कहा वो सबकुछ सच है। किसान भाइयों, मैं मजदूरों की आवाज बुलंद करने आया हूं। हम कठिन दौर से गुजर रहे है, लोकतंत्र ओर संविधान खतरे में हैं। हमारे मान मर्यादा को खतरे में डालने वाले नरेंद्र मोदी हैं। मोदी जी झांसा देते थे कि वो चाय पर रोज ट्रंप से बात करते हैं। तो क्या ट्रंप के साथ भारत को बेचने की बात करते थे।
ऐसा डरपोक प्रधानमंत्री नहीं देखा
मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे कहा कि ऐसा डरपोक प्रधानमंत्री नहीं देखा, जो प्रेस कॉन्फ्रेंस तक नहीं करता। पीएम मोदी बस कांग्रेस को डराने और धमकाने का काम करते है। लेकिन कांग्रेस डरने वाली नहीं है, हमारे कार्यकर्ताओं ने अंग्रेजों को भगाया है। असल देशभक्ति तो कांग्रेस, किसानों में है। हमारे स्वाभिमान को ट्रंप के सामने गिरवी रख दिया गया। हमने देश का अपमान नहीं किया , हमारे पास गांधी है, गोडसे नहीं। ट्रंप ने खुद बताया कि उन्होंने सीज फायर कराया। मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर रोककर बड़ी गलती की। अमेरिका में हजारों एकड़ के किसान है, वहां 2,3 फीसदी ही किसान है। हमारे देश में छोटे किसान है, वो कैसे सामना करेंगे।