रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े पाटन विधानसभा चुनाव मामले में चुनाव याचिका की कार्यवाही जारी रहेगी। भाजपा सांसद विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज कराने की कोशिश को अदालत ने स्वीकार नहीं किया है। मामला अब ट्रायल और साक्ष्यों के चरण में आगे बढ़ रहा है।
2023 के पाटन चुनाव को दी गई है चुनौती
विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी है। याचिका में चुनाव के दौरान कथित तौर पर चुनावी नियमों और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
याचिका में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन पर फैसला अदालत में पेश होने वाले दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगा।
भूपेश बघेल ने की थी याचिका खारिज करने की मांग
भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका की पोषणीयता और समय-सीमा से जुड़े आधारों पर इसे शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी। 17 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने माना कि मामले में उठाए गए कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनका निर्धारण रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल के दौरान किया जाना उचित होगा। इसलिए इस स्तर पर चुनाव याचिका को समाप्त नहीं किया गया।
45 दिन की समय-सीमा को लेकर भी उठा सवाल
मामले में चुनाव याचिका दाखिल करने की निर्धारित 45 दिन की अवधि को लेकर भी आपत्ति उठाई गई थी। हाईकोर्ट के आदेश में 2023 के चुनाव परिणाम की घोषणा 3 दिसंबर 2023 और 45 दिन की अवधि की गणना से जुड़े पक्षों की दलीलों का उल्लेख है।
हालांकि, अदालत ने यह सवाल भी रिकॉर्ड और प्रक्रिया के संदर्भ में देखने योग्य माना और याचिका को इसी आधार पर तत्काल खारिज करने से इनकार किया।
चुनावी नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर होगी जांच
चुनाव याचिका में मुख्य रूप से चुनाव के दौरान कथित नियम उल्लंघन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इन आरोपों की सत्यता का फैसला इस स्तर पर नहीं किया जा रहा है।
यानी अभी अदालत ने न तो आरोपों को सही माना है और न ही गलत। इनका परीक्षण आगे होने वाली सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
5 अक्टूबर को साक्ष्य की कार्यवाही
हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका को 5 अक्टूबर 2026 को आगे की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया है। आदेश के मुताबिक इस चरण में चुनाव याचिकाकर्ता और उनके गवाहों के साक्ष्य दर्ज किए जाने हैं। इस तरह पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ा विवाद अब शुरुआती आपत्तियों से आगे बढ़कर साक्ष्य और ट्रायल के चरण में पहुंच गया है। चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।