बस्तर। आदिवासी बहुल बस्तर जिले में स्कूली शिक्षा को बच्चों की मातृभाषा और स्थानीय बोली से जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। शिक्षा विभाग बहुभाषी शिक्षा मॉडल के जरिए शुरुआती कक्षाओं के विद्यार्थियों को उनकी परिचित भाषा में पढ़ाने पर जोर दे रहा है। विभाग का मानना है कि घर और समाज में बोली जाने वाली भाषा में पढ़ाई शुरू होने से बच्चों के लिए विषयों को समझना आसान होगा।
जिले के 1497 प्राथमिक स्कूलों में स्थानीय भाषाओं के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था लागू की गई है। इसमें हल्बी, भतरी, गोंडी के साथ विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली मिश्रित स्थानीय बोलियों को भी शामिल किया गया है।
1497 स्कूलों में अलग-अलग भाषाओं का इस्तेमाल
बस्तर जिले में कुल 1524 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 653 स्कूलों में हल्बी बोली के जरिए बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। 308 स्कूलों में भतरी भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, जबकि 203 स्कूलों में गोंडी के माध्यम से शिक्षण कराया जा रहा है।
इसके अलावा 333 प्राथमिक स्कूलों में मिश्रित स्थानीय भाषा के जरिए बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। इस तरह जिले के कुल 1497 स्कूल बहुभाषी शिक्षा मॉडल के दायरे में हैं।
हल्बी माध्यम वाले स्कूलों में 15 हजार से ज्यादा विद्यार्थी
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हल्बी भाषा वाले 653 स्कूलों में 15,423 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वहीं भतरी माध्यम से संचालित 308 स्कूलों में करीब 9,201 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
स्थानीय भाषा के इस्तेमाल का उद्देश्य बच्चों को शुरुआती कक्षाओं में पढ़ाई से जोड़ना और भाषा संबंधी परेशानी को कम करना है। विभाग के अनुसार, बच्चे जिस भाषा से बचपन से परिचित होते हैं, उसमें अवधारणाओं को समझाने से सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज हो सकती है।
शिक्षकों को दिया जा रहा बहुभाषी शिक्षण का प्रशिक्षण
इस मॉडल को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों और शैक्षणिक सहयोगियों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हाल में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पांच ब्लॉक रिसोर्स ग्रुप के सदस्यों और एलएलएफ की 24 सदस्यीय टीम ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण में स्थानीय भाषा आधारित कक्षा संचालन, बच्चों के सीखने के तरीके, आकलन प्रक्रिया और बहुभाषी शिक्षण सामग्री के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया गया।
नए सत्र के लिए तैयार होगा नया मॉड्यूल
शिक्षा विभाग आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बहुभाषी शिक्षा का नया मॉड्यूल तैयार कर रहा है। इसमें बस्तर की भाषाई विविधता और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखने की कोशिश की जा रही है।
विभाग का उद्देश्य स्थानीय बोली और औपचारिक स्कूली शिक्षा के बीच ऐसा तालमेल बनाना है, जिससे बच्चों को शुरुआती स्तर पर भाषा समझने में परेशानी न हो और वे पढ़ाई में अधिक सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
स्थानीय भाषा के साथ शिक्षा को मजबूत करने की कोशिश
बस्तर जैसे बहुभाषी क्षेत्र में एक ही भाषा के बजाय स्थानीय भाषाओं को शिक्षा से जोड़ना बच्चों तक पाठ्य सामग्री पहुंचाने का एक अलग प्रयास है। आने वाले समय में नए मॉड्यूल और प्रशिक्षण के जरिए इस व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी है।