रीवा : मध्य प्रदेश के रीवा में एक पुलिस आरक्षक को रिश्वत लेने के आरोप में निलबित कर दिया गया है। आरक्षक पर आरोप है कि उनसे कुछ पैसों के लिए आरोप को भागने में मदद की। मामला रीवा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। जिसकी जानकारी पर अधिकारियों ने विभागीय जांच शुरू की। तो वही मामला सामने आने पर रीवा पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है।
112 वाहन में तैनात थे आरक्षक
मिली जानकारी के अनुसार, ढेकहा निवासी रवि दहिया, जो कोरेक्स बेचने के मामले में फरार चल रहा था। उसे 112 वाहन में तैनात आरक्षक पंकज मिश्रा ने विद्या हॉस्पिटल के पास से उठाया, और इसके बाद एक निजी होटल में ले जाकर आरोपी से 3 लाख रुपये नकद लिए गए। इतना ही नहीं, मोबाइल छुड़ाने और ट्रैकिंग से बचाने के नाम पर, आरोपी से अतिरिक्त डेढ़ लाख रुपये भी वसूले गए। यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंची, रीवा एसपी ने इसे हल्के में लेने के बजाय भ्रष्टाचार निरोधी सेल से गोपनीय जांच करवाई गई। जहां आरोपी सही पाए गए।
आरक्षक को निलंबित कर पुलिस लाइन भेजा गया
इसके बाद आरक्षक पंकज मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। और मामले में विभागीय जांच करवाई जा रही है। जिसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर उठते सवालों का संकेत है, सवाल यह है कि अगर वर्दी पहनकर कानून के रक्षक ही सौदेबाजी करने लगें, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करेंगे। जिस पुलिस पर कानून व जनता की रक्षा की जिम्मेदारी है, उसी वर्दी में भ्रष्टाचार खुलेआम फलता दिखाई दे रहा है।