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Vikram Mastal: किसान संकट पर विक्रम मस्ताल का बड़ा हमला, 10 हजार अन्नदाता बेहाल

Vikram Mastal: किसान संकट पर विक्रम मस्ताल का बड़ा हमला, 10 हजार अन्नदाता बेहाल

मुकेश प्रजापति , सीहोर: मध्य प्रदेश में रबी सीजन की फसलों की सरकारी खरीद बंद होने के बाद अब किसानों की समस्याओं को लेकर सियासत पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और फिल्म अभिनेता विक्रम मस्ताल ने सीहोर जिले और विशेष रूप से हाई-प्रोफाइल बुधनी विधानसभा क्षेत्र में हजारों किसानों के गेहूं तुलाई से वंचित रह जाने पर वर्तमान सरकार और कृषि नेतृत्व पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। विक्रम मस्ताल ने तंज कसते हुए कहा कि जब देश की सबसे वीआईपी विधानसभाओं में से एक बुधनी में ही अन्नदाता दर-दर भटक रहा है, तो पूरे मध्य प्रदेश और भारतवर्ष में किसानों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

25% की नीति ने तोड़ी रीढ़ 

कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल ने मध्य प्रदेश की वर्तमान कृषि व उपार्जन नीतियों को 'किसान विरोधी' बताते हुए कहा कि सूबे का अन्नदाता आज चारों तरफ से प्रशासनिक प्रताड़ना और आर्थिक संकट झेल रहा है। उन्होंने कहा कि पोर्टल बंद होने और स्लॉट बुकिंग की तकनीकी खामियों के चलते अकेले बुधनी विधानसभा और सीहोर जिले के करीब 10 हजार किसान अपनी गेहूं की फसल तोलने से पूरी तरह वंचित रह गए हैं। सरकार की नई नीतियों के तहत मूंग खरीदी में महज 25 प्रतिशत तुलाई का नियम लागू किया गया है, जिसने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। फसलें न बिकने के कारण किसानों पर एक तरफ जहां कोऑपरेटिव सोसायटियों (सहकारी समितियों) के ब्याज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग के भारी-भरकम बिलों ने उनकी रात की नींद उड़ा दी है।

मामा की कोचिंग, साहबजादे की लॉन्चिंग

कृषि विभाग और क्षेत्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर तीखा हमला बोलते हुए विक्रम मस्ताल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है कि माननीय कृषि मंत्री जी और क्षेत्र के रसूखदार नेता किसानों के इस महासंकट पर ध्यान देने के बजाय इन दिनों 'मामा की क्लास' और 'मामा की कोचिंग' चलाने जैसे आयोजनों में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। पूरी बुधनी विधानसभा क्षेत्र में केवल अपने 'साहबजादे' (पुत्र) को राजनीतिक रूप से लॉन्च करने की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। हर छोटे-बड़े शिलान्यास और विकास कार्य का श्रेय लूटने की होड़ मची है, जबकि हकीकत यह है कि असली किसान अपने खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को औने-पौने दाम में बेचने के लिए मंडियों के चक्कर काट रहा है।

विक्रम मस्ताल ने उठाई 4 सूत्रीय मांग

विक्रम मस्ताल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सरकारी खरीदी बंद होने का फायदा उठाकर निजी व्यापारी और बिचौलिए अब किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। फसलें औने-पौने दामों पर खरीदी जा रही हैं। यदि समय रहते सरकार नहीं जागी तो हजारों किसान पूरी तरह बर्बाद और कर्ज के दलदल में डूब जाएंगे। 

रखी ये मांगे

सरकारी उपार्जन पोर्टल को तत्काल कम से कम 2 दिनों के लिए पुनः खोला जाए ताकि वंचित किसानों की स्लॉट बुकिंग हो सके।
जितने भी शेष किसान बचे हैं, उनके गेहूं और मूंग की शत-प्रतिशत तुलाई की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
सोसायटियों के बढ़ते कर्ज और उसके ब्याज पर किसानों को तत्काल राहत व छूट दी जाए।
किसानों पर थोपे जा रहे भारी-भरकम बिजली बिलों और उपार्जन संकट पर सरकार कैबिनेट में गंभीर निर्णय ले।


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