छत्तीसगढ़ में कर्मचारी-अधिकारियों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर में भोजनावकाश के दौरान जोरदार प्रदर्शन किया गया, जिसमें हजारों कर्मचारियों और शिक्षकों ने भाग लिया।
राजधानी में दिखा आंदोलन का सबसे बड़ा असर
राजधानी रायपुर और नवा रायपुर में कर्मचारियों ने इंद्रावती भवन से निकलकर रैली निकाली और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलन का नेतृत्व प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा और महासचिव चंद्रशेखर तिवारी ने किया।
जिला और संभाग स्तर पर भी प्रदर्शन
महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और बलौदाबाजार समेत कई जिलों में कर्मचारियों ने रैलियां निकालकर विरोध जताया। इसी तरह दुर्ग संभाग के राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा और कबीरधाम में भी आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।
बिलासपुर संभाग के जांजगीर-चांपा, कोरबा, मुंगेली और रायगढ़ में भी कर्मचारी सड़कों पर उतरे। वहीं बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगों को दोहराया।
इन मांगों को लेकर बढ़ा आंदोलन
फेडरेशन की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ता एरियर का भुगतान, समयमान वेतनमान (8, 16, 24 और 32 वर्ष), 300 दिन तक अर्जित अवकाश नगदीकरण, वेतन विसंगतियों का समाधान और शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ देना शामिल है।
इसके साथ ही अनुकंपा नियुक्ति में ढील, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण और रिक्त पदों पर जल्द भर्ती जैसी मांगें भी उठाई गई हैं।
सरकार को चेतावनी
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि यदि सरकार जल्द कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में कर्मचारियों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।