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Amli Ghat : आंवली घाट पर उमड़ा जनसैलाब, जानें क्यों खास है यहां की भूतड़ी अमावस्या

Amli Ghat : आंवली घाट पर उमड़ा जनसैलाब, जानें क्यों खास है यहां की भूतड़ी अमावस्या

मुकेश प्रजापति, भैरूंदा : बात चैत्र मास की अमावस्या की हो तो नर्मदा तट आंवली घाट का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आज भूतड़ी अमावस्या के पावन अवसर पर इस पवित्र तट पर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का संगम देखने को मिल रहा है। मान्यता है कि आज के दिन नर्मदा के पावन जल में डुबकी लगाने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक व्याधियों से भी मुक्ति मिलती है। 

नर्मदा के उत्तरी तट पर स्थित आंवली घाट तांत्रिक और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए पूरे देश में विख्यात है। यहां केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से भी बड़ी संख श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है। नर्मदा स्नान से इस नकारात्मक अजा का प्रभाव अधक हता हा नमदा स्नान स इन शक्तियों का शमन होता है, जिसे स्थानीय भाषा में बाधा मुक्ति कहा जाता है।

क्या है भूतड़ी अमावस्या का इतिहास

इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार आंवली घाट प्राचीन काल से ही साधु-संतों और तांत्रिकों की साधना स्थली रहा है। चैत्र अमावस्या की रात को तांत्रिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

नाम का रहस्य

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है, इसी कारण इसे भूतड़ी अमावस्या का नाम दिया गया।

पूर्वजों का तर्पण

श्रद्धालु यहां न केवल खुद की शुद्धि के लिए आते हैं, बल्कि अपने पूर्वजों के तर्पण और कुल देवताओं की पूजा के लिए भी विशेष अनुष्ठान करते हैं।

नर्मदे हर के जयघोष से गुंजायमान हुए तट

अमावस्या की मध्यरात्रि से ही नर्मदा के तटों पर श्रद्धालुओं का रेला शुरू हो गया। जल में दीप दान और धूप-दीप की सुगंध के बीच नर्मदे हर के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर यहां दान-पुण्य भी कर रहे हैं।

सुरक्षा का कड़ा पहरा

श्रद्धालुओं भीड़ और नर्मदा के गहरे पानी को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के निर्देशन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नदी के घाटों पर टीमें तैनात हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत के नेतृत्व में भारी पुलिस बल, होमगार्ड और ग्राम रक्षा समिति के सदस्य चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं।

पौराणिक महत्व

धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि गंगा कनखल में और सरस्वती कुरुक्षेत्र में पवित्र है, लेकिन नर्मदा हर स्थान पर परम पावन है। भगवान शिव व पुत्री मानी जाने वाली नर्मदा के प्रति यही अटूट श्रद्धा आज आंवली घाट पर जनसैलाब के रूप में दिखाई दे रही है।


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