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मध्यप्रदेश के गांव से मुंबई तक गूंजा सुनील का सुर, दृष्टिबाधित गायक की आवाज ने बनाई फिल्म ‘हनुमान अंश’ में पहचान

मध्यप्रदेश के गांव से मुंबई तक गूंजा सुनील का सुर, दृष्टिबाधित गायक की आवाज ने बनाई फिल्म ‘हनुमान अंश’ में पहचान

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक छोटे से गांव से निकली आवाज अब सोशल मीडिया से लेकर फिल्मी पर्दे तक अपनी पहचान बना रही है। सुरखी विधानसभा क्षेत्र के अगरा गांव के रहने वाले 25 वर्षीय सुनील सिंह लोधी जन्म से दृष्टिबाधित हैं। उन्होंने दुनिया को अपनी आंखों से भले ही नहीं देखा, लेकिन संगीत के जरिए लोगों के दिलों तक पहुंचने का रास्ता जरूर खोज लिया। आर्थिक परेशानियों और जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद सुनील ने संगीत का साथ नहीं छोड़ा। गांव में धार्मिक आयोजनों और भजन कार्यक्रमों से शुरू हुआ उनका सफर अब मुंबई तक पहुंच चुका है। खास बात यह है कि उनके गाए एक बुंदेली भजन को फिल्म ‘हनुमान अंश’ में जगह मिली है।

बचपन से था भजन और संगीत का शौक

सुनील जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं। परिवार ने उनकी आंखों की रोशनी वापस लाने के लिए इलाज की कई कोशिशें कीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। आर्थिक स्थिति भी बेहतर नहीं थी, जिसके कारण उनकी पढ़ाई ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। मुश्किल परिस्थितियों ने कई बार उन्हें निराश किया। जिंदगी में एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने सब कुछ खत्म करने तक का विचार किया, लेकिन संगीत उनके लिए उम्मीद की वजह बन गया। बचपन से ही सुनील को भजन और गीत गाने का शौक था। स्कूल और गांव में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में जब भी उन्हें गाने का अवसर मिलता, वह पूरे उत्साह से अपनी आवाज का जादू बिखेरते।

2019 में दोस्त रोहित ने बदली जिंदगी की दिशा

सुनील की जिंदगी में बड़ा बदलाव साल 2019 में आया। इसी दौरान उनकी मुलाकात गांव के रहने वाले रोहित साहू से हुई। रोहित ने सुनील की आवाज को पहचाना और उनके गाए भजनों की रिकॉर्डिंग कर सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करना शुरू किया। धीरे-धीरे सुनील की आवाज गांव की सीमाओं से बाहर निकलने लगी। सोशल मीडिया पर उनके भजनों को लोगों का प्यार मिलने लगा और उनकी पहचान बढ़ती गई। इसके बाद सुनील ने इंदौर में रिकॉर्डिंग की और उन्हें मुंबई जाकर भी गाने का मौका मिला। यहीं से उनके सपनों को एक नई उड़ान मिली।

सोशल मीडिया की एक रील पहुंची फिल्म निर्देशक तक

मुंबई में वर्सोवा बीच पर बनाई गई सुनील की एक रील ने उनकी किस्मत बदल दी। यह वीडियो फिल्म निर्देशक विशाल चतुर्वेदी तक पहुंचा। सुनील की आवाज से प्रभावित होकर निर्देशक ने उन्हें स्टूडियो बुलाया और उनके कई भजन सुने। इनमें ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ उन्हें खास तौर पर पसंद आया। इसके बाद इस बुंदेली भजन को फिल्म ‘हनुमान अंश’ में शामिल करने का फैसला किया गया। सुनील के लिए यह उनके संगीत सफर की बड़ी उपलब्धि साबित हुई।

सोशल मीडिया पर छाया सुनील का भजन

फिल्म में जगह मिलने के बाद सुनील का यह भजन सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों की पसंद बन रहा है। उनके गाए भजन पर बड़ी संख्या में लोग रील्स बना रहे हैं। जिस आवाज की शुरुआत सागर के एक छोटे से गांव में धार्मिक आयोजनों से हुई थी, वही आवाज अब सोशल मीडिया के जरिए हजारों लोगों तक पहुंच रही है।

दोस्त रोहित को मानते हैं सफर का अहम हिस्सा

सुनील अपनी इस सफलता में दोस्त रोहित साहू की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। रोहित ने न केवल उनकी आवाज को रिकॉर्ड किया बल्कि उसे सोशल मीडिया तक पहुंचाने में भी मदद की। सुनील की कहानी इस बात की मिसाल है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हुनर के साथ हौसला और सही साथी मिल जाए तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बनाया जा सकता है।

अब जुबिन नौटियाल के साथ गाने का सपना

सुनील ने अपनी दृष्टिबाधिता को कभी अपनी पहचान की सीमा नहीं बनने दिया। आज उनकी आंखों की रोशनी भले ही उनका साथ न देती हो, लेकिन उनकी आवाज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। गांव से शुरू हुआ उनका सफर इंदौर, मुंबई और अब फिल्मी दुनिया तक पहुंच चुका है। सुनील की अगली ख्वाहिश मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के साथ गीत गाने की है। उनकी कहानी सिर्फ एक गायक के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि हुनर को अगर हौसले और सही मौके का साथ मिल जाए तो अंधेरे से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।


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