MP Assembly : मध्यप्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को सिंगरौली कोल ब्लॉक, अवैध खनन,और नर्सिंग घोटाले के मुद्दों पर जमकर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर केवल आंकड़े गिनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जमीनी हकीकत कुछ और है और सरकार को आंकड़ों की बजाय जमीन पर काम करना चाहिए।
सिंगरौली और विस्थापन पर बहस
सदन में सिंगरौली के धिरौली कोयला परियोजना को लेकर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि कुल कितने गांव प्रभावित हुए, कितनों का विस्थापन हुआ और कितनों का नहीं। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने जवाब दिया कि 8 गांवों में से 5 गांव की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इस पर सिंघार ने कहा कि जब 3 गांवों का अधिग्रहण नहीं हुआ तो कोल विभाग को जमीन कैसे सौंप दी गई।
मंत्री वर्मा का जबाव
मंत्री ने बताया कि 3.68 अरब रुपये से अधिक की राशि से लोगों का पुनर्वास किया जाएगा और प्रत्येक पात्र आदिवासी को कम से कम 50 लाख रुपये तक का लाभ मिलेगा। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 12,098 परिवारों के हिसाब से प्रति परिवार राशि बहुत कम बैठती है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भूमि का दोगुना मुआवजा और मकान का अलग मुआवजा दिया गया है तथा 1552 लोगों को लाभ मिलेगा। अतिक्रमण करने वालों को मुआवजा नहीं दिया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पात्र लोगों को शीघ्र मुआवजा मिलना चाहिए और यदि कोई उल्लंघन हुआ है तो मंत्री जांच कराएंगे। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि जांच पूरी होने तक खनन कार्य रोका जाए।
सिंघार ने किए दस्तावेज पेश
उमंग सिंघार ने सदन में आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों से जुड़े परिजनों के खातों में लाखों रुपये की रिश्वत दी गई। उन्होंने कहा की जितेंद्र भदौरिया थाना प्रभारी की पत्नी को 15 लाख की रिश्वत की दी गई। उनकी पत्नी के खाते में 14 लाख दिए गए। उन्होंने संबंधित दस्तावेज पटल पर रखे और विधानसभा स्तर पर जांच की मांग की।
अवैध खनन और नर्सिंग घोटाले पर हंगामा
सदन में अवैध खनन का मुद्दा भी गूंजा। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में रणनीति बनाने के बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन में पहुंचे। नर्सिंग घोटाले के मामले में सरकार के जवाब रिकॉर्ड जल गया को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। हंगामे के चलते प्रश्नकाल बाधित हुआ और कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।