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टाटीबंध के गोदाम में कृषि विभाग का छापा, 531 क्विंटल खाद सीज; व्यापारी पर FIR

टाटीबंध के गोदाम में कृषि विभाग का छापा, 531 क्विंटल खाद सीज; व्यापारी पर FIR

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अवैध उर्वरक भंडारण के खिलाफ कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आमानाका थाना क्षेत्र के टाटीबंध स्थित नगर गोदाम में विभागीय टीम ने छापेमारी कर बिना वैध लाइसेंस के रखे गए रासायनिक उर्वरकों का पता लगाया। जांच के बाद बड़ी मात्रा में खाद को जब्त कर सीज कर दिया गया है।

टाटीबंध के नगर गोदाम में छापेमारी

कृषि विभाग को टाटीबंध इलाके में अवैध तरीके से उर्वरक के भंडारण की जानकारी मिली थी। इसके बाद टीम ने नगर गोदाम में पहुंचकर जांच की। निरीक्षण के दौरान गोदाम में विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरक बड़ी मात्रा में रखे मिले।

विभाग के मुताबिक, गोदाम में उर्वरक के भंडारण के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस मौजूद नहीं था। इसके बाद अधिकारियों ने नियमानुसार खाद को सीज करने की कार्रवाई की।

22 प्रकार की 531 क्विंटल खाद सीज

छापेमारी के दौरान कृषि विभाग की टीम ने 22 अलग-अलग प्रकार के कुल 531 क्विंटल उर्वरक को सीज किया है। इतनी बड़ी मात्रा में बिना वैध लाइसेंस खाद का भंडारण मिलने के बाद विभाग ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

मामले में व्यापारी रविंद्र कुमार मित्तल का नाम सामने आया है। कृषि विभाग की शिकायत के आधार पर आमानाका पुलिस ने व्यापारी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में उर्वरक कहां से लाया गया था और बिना लाइसेंस इसके भंडारण के पीछे क्या वजह थी।

इसके अलावा खाद की खरीद-बिक्री और उसके संभावित वितरण से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अवैध उर्वरक कारोबार पर विभाग की नजर

कृषि विभाग की इस कार्रवाई को राजधानी में अवैध उर्वरक भंडारण और कारोबार पर शिकंजा कसने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बिना जरूरी अनुमति और लाइसेंस के खाद का भंडारण किसानों तक उर्वरक की वैध आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

विभाग की टीम अब जब्त किए गए उर्वरकों से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है। फिलहाल पुलिस और कृषि विभाग की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।


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