रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर थाना क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पंचायत सचिव को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन बेचकर 27 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
कैसे हुआ पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, यह मामला 5 जून का है जब प्रार्थी इंद्रजीत वर्मा, निवासी ग्राम लिंजिर (जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़), ने थाना पुसौर में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी पहचान ग्राम बघनपुर निवासी भीचरण पटेल से बचपन से थी, जो शासकीय सेवा में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत है। आरोपी ने अपनी बताई गई जमीन ग्राम कोडातराई, तहसील पुसौर (खसरा नंबर 1021/2, रकबा 0.1050 हेक्टेयर) को बेचने का प्रस्ताव दिया। दोनों के बीच 16 सितंबर 2022 को 35 लाख रुपये में सौदा तय हुआ, जिसमें प्रार्थी ने 27 लाख रुपये अग्रिम भुगतान कर दिए।
फर्जी दस्तावेजों से भरोसा जीतने की कोशिश
आरोपी ने किसान किताब और अन्य राजस्व दस्तावेज दिखाकर पीड़ित का विश्वास जीता और आश्वासन दिया कि नामांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद रजिस्ट्री कर दी जाएगी। लेकिन लंबे समय तक वह बहाने बनाकर मामले को टालता रहा। जब पीड़ित ने तहसील कार्यालय से जांच की तो पता चला कि उक्त भूमि आरोपी के नाम दर्ज ही नहीं थी और न ही कोई राजस्व प्रक्रिया लंबित थी।
चेक भी हुए बाउंस, नहीं लौटाई रकम
दबाव बढ़ने पर आरोपी ने 5 लाख रुपये और 11-11 लाख रुपये के दो चेक दिए, लेकिन बैंक में सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद भी आरोपी लगातार आश्वासन देता रहा। जनवरी 2025 में आरोपी ने केवल 1 लाख रुपये लौटाए, लेकिन शेष राशि वापस नहीं की।
पुलिस कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना पुसौर में अपराध क्रमांक 159/2026, धारा 420 भादवि के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच में आरोप सही पाए जाने पर पुलिस ने पंचायत सचिव भीचरण पटेल (54 वर्ष), निवासी ग्राम बघनपुर, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि जमीन खरीद-फरोख्त में दस्तावेजों की पूरी जांच और कानूनी सत्यापन बेहद जरूरी है, वरना बड़ी आर्थिक धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ सकता है।