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'सिंधु जल समझौता रद्द होना चाहिए', उमर अब्दुल्ला का पाकिस्तान पर बड़ा वार

'सिंधु जल समझौता रद्द होना चाहिए', उमर अब्दुल्ला का पाकिस्तान पर बड़ा वार

Omar Abdullah News: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को लेकर केंद्र सरकार से बड़ा कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ यह समझौता अब हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाना चाहिए। उमर ने जम्मू-कश्मीर की नदियों पर स्थानीय लोगों के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को रोके जाने के फैसले का समर्थन किया।

मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान की ओर से पानी को लेकर दिए गए बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों और अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले को लेकर भी अपनी बात रखी।

सिंधु जल समझौते को लेकर उमर का बड़ा बयान

पाकिस्तान की ओर से यह चेतावनी दिए जाने पर कि पानी रोकने की कोशिश का जवाब गंभीर होगा, उमर अब्दुल्ला ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की नदियों पर सबसे पहला अधिकार यहां के लोगों का होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि पाकिस्तान एक तरफ कश्मीरियों के हित की बात करता है, लेकिन दूसरी ओर सिंधु जल समझौते के जरिए जम्मू-कश्मीर के जल संसाधनों का इस्तेमाल करता रहा है। उमर ने कहा कि 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को रोकने के फैसले को जारी रखा जाना चाहिए।

उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर की नदियों को लेकर किसी भी व्यवस्था में क्षेत्र के लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

'पूर्ण राज्य का दर्जा कब मिलेगा?'

उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने के केंद्र के वादे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने आश्वासन का जिक्र करते हुए पूछा कि अब तक राज्य का दर्जा बहाल क्यों नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री ने इसे बड़ा राजनीतिक वादा बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर आगे भी राजनीतिक दबाव बनाया जाएगा।

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की धमकियों पर चिंता

घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कथित आतंकी धमकियां मिलने पर भी उमर अब्दुल्ला ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से इन धमकियों को हल्के में न लेने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले भी टारगेटेड किलिंग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में किसी भी धमकी की गहराई से जांच होनी चाहिए और कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म होने का दावा किया जा रहा है तो इस तरह की धमकियां सामने कैसे आ रही हैं। उमर ने धमकी देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

सुखबीर बादल पर हमले की भी निंदा

अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले को लेकर भी उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया। उमर ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को Z+ सुरक्षा मिली हुई है, फिर भी उस पर हमला हो जाता है तो सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक राजनीतिक मतभेदों का समाधान हिंसा से नहीं बल्कि चुनाव और वोट की ताकत से होना चाहिए।


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