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CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा की 543 सीटें स्थायी रखने की मांग

CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा की 543 सीटें स्थायी रखने की मांग

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार के सामने बड़ी मांग रखी है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संविधान में जरूरी संशोधन करने की अपील की है, ताकि लोकसभा की कुल 543 सीटों की मौजूदा संख्या स्थायी रूप से बरकरार रहे।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में 12 अगस्त 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया है। इस प्रस्ताव में संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के संभावित परिसीमन के साथ-साथ महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग भी शामिल है।

लोकसभा की सीटों का मौजूदा बंटवारा न बदले

मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र से आग्रह किया है कि लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 पर ही स्थिर रखी जाए। इसके साथ ही राज्यों के बीच वर्तमान संसदीय सीटों का जो वितरण है, उसमें भी बदलाव नहीं किया जाए। तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर भविष्य में सीटों का पुनर्विन्यास किया गया तो दक्षिणी राज्यों की संसद में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मौजूदा प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने के लिए संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव जरूरी है।

महिलाओं के 33% आरक्षण की भी मांग

तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव में सिर्फ परिसीमन ही नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की मांग भी उठाई गई है। प्रस्ताव के मुताबिक आगामी लोकसभा चुनावों के साथ-साथ इसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से विधानसभा के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक संवैधानिक संशोधन करने का अनुरोध किया है।

दक्षिणी राज्यों को सीटें घटने का डर

परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों की चिंता मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व में संभावित बदलाव से जुड़ी है। आशंका है कि आगामी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर यदि लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण हुआ, तो कम जनसंख्या वृद्धि वाले दक्षिणी राज्यों की सीटों का अनुपात घट सकता है। तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव में इसी आशंका को प्रमुखता से उठाया गया है। राज्य का कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण को सफलतापूर्वक लागू किया, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

1967 का उदाहरण देकर रखी बात

मुख्यमंत्री ने परिसीमन के पुराने अनुभव का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, 1967 में तमिलनाडु की लोकसभा सीटों की संख्या 41 से घटाकर 39 कर दी गई थी। तमिलनाडु सरकार का मानना है कि भविष्य में होने वाली परिसीमन प्रक्रिया में ऐसे बदलावों से बचना जरूरी है, जिससे राज्यों के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हो।

विधानसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ प्रस्ताव

12 अगस्त 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव को विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन मिला। विधानसभा में परिसीमन के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से भी तमिलनाडु के हितों की रक्षा करने की बात कही गई। राज्य की राजनीति में यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों में पहले से ही राजनीतिक और संवैधानिक बहस चल रही है।

'जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को न मिले सजा'

तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव में सबसे प्रमुख तर्क यह है कि जिन राज्यों ने पिछले दशकों में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए, उन्हें संसद में कम प्रतिनिधित्व के रूप में इसकी कीमत नहीं चुकानी चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कल्याण में निवेश करने वाले राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी कम होना उनके लिए अनुचित होगा। अब मुख्यमंत्री विजय के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र के बाद परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। इस मामले में केंद्र सरकार का अगला कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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