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युवक की हत्या या आत्महत्या? 2 महीने बाद भी नहीं खुला मौत का राज, परिवार ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

युवक की हत्या या आत्महत्या? 2 महीने बाद भी नहीं खुला मौत का राज, परिवार ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

सैय्यद वाजिद, मुंगेली। जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत अमरटापू-मोतिमपुर में निर्माणाधीन पुल पर युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी पर लटकी लाश मिलने के मामले में करीब दो महीने बाद भी मौत की गुत्थी नहीं सुलझ पाई है। शुरुआत में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह को लेकर स्पष्ट अभिमत नहीं मिलने से पुलिस की जांच उलझ गई है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि युवक ने आत्महत्या की थी या उसकी हत्या कर शव को फांसी पर लटकाया गया था। दूसरी ओर, मृतक के परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए तीन युवकों पर संदेह जाहिर किया है और पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। न्याय की आस में दो महीने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे परिजनों ने अब सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आंदोलन और सीएमएचओ कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम टेढ़ाधौरा निवासी 23 वर्षीय पीयूष सिंह कांति कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार के अधीन अमरटापू-मोतिमपुर में निर्माणाधीन पुल पर चौकीदार के रूप में काम करता था। बीते 20 अगस्त को निर्माण स्थल पर उसका शव फांसी के फंदे पर संदिग्ध परिस्थितियों में लटका हुआ मिला था। घटना के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारणों पर स्पष्ट राय नहीं मिलने के बाद मामला पेचीदा हो गया। अब पुलिस हर संभावित पहलू को ध्यान में रखकर जांच करने की बात कह रही है, लेकिन चिकित्सकीय अभिमत के अभाव में विवेचना आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही है।

शव की स्थिति और डॉक्टर के बताए अनुसार परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

मृतक के परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के बताए अनुसार और घटनास्थल पर शव जिस स्थिति में मिला था उससे उन्हें शुरू से ही हत्या की आशंका है। उनका दावा है कि पीयूष की हत्या कर मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। परिजनों ने युवक के साथ आखिरी समय में मौजूद रहे तीन युवकों पर संदेह जताते हुए उनके नाम सहित लिखित आवेदन पुलिस को सौंपा है।परिजनों ने जांच के शुरुआती चरण में लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने उन परिस्थितियों और संदिग्ध बिंदुओं को गंभीरता से नहीं लिया, जिनसे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती थी। इस संबंध में परिजनों ने पुलिस को चार पन्नों का विस्तृत दस्तावेज सौंपा है, जिसमें उन तमाम बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, जिनके आधार पर वे पीयूष की मौत को आत्महत्या के बजाय हत्या मान रहे हैं।

पीएम रिपोर्ट की फाइल बिलासपुर से रायपुर तक लगा रही चक्कर

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय अभिमत को लेकर खड़ा हो रहा है। परिजनों के मुताबिक, पोस्टमार्टम के दौरान भी मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई थी। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक जांच के लिए बिसरा सुरक्षित कर भेजा था। अब बिसरा रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम से संबंधित दस्तावेजों को चिकित्सकीय विशेषज्ञों के पास भेजकर मौत के कारणों पर अंतिम राय लेने की प्रक्रिया चल रही है।हैरानी की बात यह है कि घटना के करीब दो महीने बाद भी पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की ओर से स्पष्ट अभिमत सामने नहीं आया है। जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम से संबंधित फाइल बिलासपुर से वापस मुंगेली पहुंची, लेकिन वहां भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण उसे दोबारा रायपुर भेजे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में मौत की असल वजह जानने के लिए परिजन लगातार इंतजार कर रहे हैं, वहीं चिकित्सकीय राय के अभाव में पुलिस की विवेचना भी आगे बढ़ने का इंतजार कर रही है।

हताश पिता का दर्द, न्याय की आस में सिस्टम के चक्कर काट रहा परिवार

बेटे की संदिग्ध मौत के दो महीने बाद भी जवाब नहीं मिलने से पिता पुष्पराज सिंह का धैर्य अब जवाब देने लगा है। उनका कहना है कि बेटे को न्याय दिलाने की उम्मीद लेकर वे लगातार पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन और निराशा ही हाथ लगी है। घर लौटने पर परिवार के सदस्य उनसे पूछते हैं कि बेटे की मौत की जांच में क्या हुआ, लेकिन उनके पास बताने के लिए कोई ठोस जवाब नहीं होता,पिता की पीड़ा यह है कि जिस बेटे की मौत का सच सामने आना चाहिए, उसी सच को जानने के लिए उन्हें महीनों से दफ्तरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। परिवार का आरोप है कि न्याय की उम्मीद में सरकारी व्यवस्था का दरवाजा खटखटाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। बेटे को खोने का गम और मौत की वजह स्पष्ट नहीं होने की पीड़ा ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है।

सात दिन का अल्टीमेटम, सीएमएचओ कार्यालय घेराव की चेतावनी

लगातार हो रही देरी से नाराज परिजनों ने अब स्वास्थ्य विभाग के सामने अपनी मांग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिवस के भीतर पीयूष सिंह की मौत के संबंध में स्पष्ट चिकित्सकीय अभिमत उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे और सीएमएचओ कार्यालय का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि दो महीने बीत जाने के बाद भी यदि मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाती है, तो आखिर पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे?

फिलहाल पीयूष सिंह की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे हत्या की साजिश थी, इसका खुलासा चिकित्सकीय अभिमत और पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा। लेकिन दो महीने से लंबित इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टिंग प्रक्रिया और पुलिस विवेचना की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सात दिन के अल्टीमेटम के बाद विभाग स्पष्ट राय देता है या फिर न्याय की आस में भटक रहे परिवार को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है।


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