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MP Teacher Scam: दिव्यांग कोटे से नौकरी पाने वाले 5 शिक्षकों पर गिरी गाज, मेडिकल जांच में खुला फर्जीवाड़ा

MP Teacher Scam: दिव्यांग कोटे से नौकरी पाने वाले 5 शिक्षकों पर गिरी गाज, मेडिकल जांच में खुला फर्जीवाड़ा

राजगढ़: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में दिव्यांग कोटे से सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। शिकायत के बाद दोबारा कराई गई मेडिकल जांच में पांच उच्च माध्यमिक शिक्षकों के दिव्यांग होने के दावे सही नहीं पाए गए। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त ने सभी पांच शिक्षकों की नियुक्तियां निरस्त करते हुए उनकी सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं बताया गया है कि संबंधित शिक्षक करीब तीन साल से सरकारी सेवा में कार्यरत थे और इसी दौरान उन्हें वेतन भी मिलता रहा। मामला सामने आने के बाद अब विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

मेडिकल बोर्ड की जांच में सामने आया मामला

शिक्षकों के दिव्यांग प्रमाण-पत्रों को लेकर शिकायत मिलने के बाद जिला स्तर पर जांच शुरू की गई। प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच के लिए मामला भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के मेडिकल बोर्ड के पास भेजा गया। मेडिकल बोर्ड में डॉक्टरों की टीम ने संबंधित शिक्षकों की जांच की। जांच रिपोर्ट में सभी पांच शिक्षक सामान्य और शारीरिक रूप से फिट पाए गए। इसके बाद उनके दिव्यांग प्रमाण-पत्रों की वैधता पर सवाल खड़े हुए और विभाग ने नियुक्ति निरस्त करने की कार्रवाई की।

श्रवण और दृष्टिबाधित होने का किया था दावा

जांच के अनुसार, इन शिक्षकों ने दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए खुद को श्रवण-बाधित और दृष्टिबाधित बताया था। इन्हीं दावों और प्रस्तुत किए गए प्रमाण-पत्रों के आधार पर उन्हें उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर नियुक्ति मिली थी। हालांकि, दोबारा मेडिकल परीक्षण में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अलग रही। जांच में सभी पांचों को सामान्य और शारीरिक रूप से फिट पाया गया।

करीब तीन साल से सरकारी सेवा में थे

बताया जा रहा है कि इन शिक्षकों ने संबंधित प्रमाण-पत्रों के आधार पर करीब तीन साल पहले सरकारी नौकरी ज्वाइन की थी। इस अवधि में वे शिक्षा विभाग में कार्यरत रहे और उन्हें सरकारी खजाने से वेतन भी प्राप्त हुआ। अब नियुक्तियां निरस्त होने के बाद विभाग की ओर से मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पहले भी 5 शिक्षकों पर हुई थी कार्रवाई

राजगढ़ में दिव्यांग प्रमाण-पत्रों से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जून 2023 में भी पांच शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा चुकी है। उन मामलों में भी दिव्यांग कोटे के तहत नियुक्ति और प्रमाण-पत्रों की जांच के बाद कार्रवाई हुई थी। लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए शिक्षा विभाग अब दिव्यांग प्रमाण-पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया को और सख्त करने की तैयारी में है।

अब क्रॉस-वेरिफिकेशन के बाद ही नियुक्ति

राजगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी सावन पाटीदार के अनुसार, भविष्य में दिव्यांग कोटे से नियुक्त होने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किए बिना नियुक्ति नहीं दी जाएगी। विभाग का कहना है कि दस्तावेजों की दोबारा जांच और आवश्यक मेडिकल सत्यापन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि आरक्षण का लाभ वास्तविक पात्र उम्मीदवारों तक ही पहुंच सके।


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