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MPBSE का बड़ा बदलाव: बोर्ड परीक्षा फॉर्म से आधार की अनिवार्यता हटेगी, 17 लाख छात्रों को राहत

MPBSE का बड़ा बदलाव: बोर्ड परीक्षा फॉर्म से आधार की अनिवार्यता हटेगी, 17 लाख छात्रों को राहत

भोपाल। मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परीक्षा फॉर्म को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब विद्यार्थियों के लिए परीक्षा फॉर्म भरते समय आधार नंबर या आधार आईडी देना अनिवार्य नहीं होगा। बोर्ड की ओर से आधार की अनिवार्यता को वैकल्पिक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह बदलाव लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से भेजे गए पत्र के बाद किया जा रहा है। इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका आधार कार्ड अभी नहीं बना है या आधार में दर्ज जानकारी का सत्यापन नहीं हो पा रहा है।

17 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को होगा फायदा

मध्यप्रदेश में 10वीं और 12वीं कक्षा में 17 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। अधिकारियों के अनुसार इनमें करीब 20 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास अभी आधार आईडी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में परीक्षा फॉर्म में आधार को अनिवार्य किए जाने से बड़ी संख्या में छात्रों और स्कूलों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई विद्यार्थियों का आधार अभी बना नहीं है, जबकि कुछ छात्रों के आधार कार्ड में दर्ज नाम, जन्मतिथि या अन्य विवरण का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इससे परीक्षा फॉर्म भरने और विद्यार्थियों का डेटा ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही थी।

विद्यार्थियों का डिजिटल शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार करने की थी योजना

दरअसल, MPBSE ने विद्यार्थियों के स्थायी शैक्षणिक रिकॉर्ड को तैयार करने के उद्देश्य से आधार की जानकारी को परीक्षा फॉर्म से जोड़ने की व्यवस्था शुरू की थी। विद्यार्थियों की जानकारी को यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) पोर्टल से लिंक करने की योजना है। इस डिजिटल रिकॉर्ड में विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ी अलग-अलग जानकारियां एक ही रिकॉर्ड से जोड़े जाने की व्यवस्था की जा रही है। इसमें परीक्षा परिणाम, अंक, प्रमाणपत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज शामिल किए जा सकते हैं।

मार्कशीट से लेकर ट्रांसफर सर्टिफिकेट तक रिकॉर्ड होगा व्यवस्थित

विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड में मार्कशीट, चरित्र प्रमाणपत्र और ट्रांसफर सर्टिफिकेट जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी शामिल की जा रही हैं। इसके अलावा रक्त समूह और शारीरिक विवरण जैसी जानकारी को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने की प्रक्रिया जारी है। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन से जुड़े दस्तावेजों और जरूरी जानकारी को एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध कराना है। इसी प्रक्रिया में आधार को पहचान के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।

आधार सत्यापन में आ रही थीं कई दिक्कतें

स्कूलों की ओर से सामने आया कि कई विद्यार्थियों के आधार बनवाने और उनका सत्यापन कराने में समस्याएं आ रही थीं। कुछ मामलों में विद्यार्थियों के दस्तावेज अधूरे थे, जबकि कई दस्तावेजों में नाम या दूसरी जानकारी में अंतर पाया गया। इसके अलावा आधार में दर्ज विवरण और समग्र पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के बीच अंतर होने से भी सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। ऐसी स्थिति में परीक्षा फॉर्म और विद्यार्थियों का डेटा अपलोड करने में स्कूलों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

आधार अनिवार्य नहीं होने से छात्रों को राहत

आधार नंबर की अनिवार्यता खत्म होने से उन विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी, जिनका आधार अभी तैयार नहीं हुआ है या जिनके आधार विवरण का सत्यापन लंबित है। अब केवल आधार उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की परीक्षा फॉर्म प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। हालांकि, विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया जारी रहेगी। बोर्ड और स्कूल विद्यार्थियों की अन्य जरूरी जानकारी के आधार पर रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।


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