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छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर सरकार सख्त, बिना स्टे वाले कर्मचारियों की होगी बर्खास्तगी

छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर सरकार सख्त, बिना स्टे वाले कर्मचारियों की होगी बर्खास्तगी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी, गलत या झूठे जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी संबंधित विभागों से ऐसे मामलों में अब तक की गई कार्रवाई की अद्यतन जानकारी तत्काल मांगी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन शासकीय सेवकों के जाति प्रमाण पत्र को उच्च स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति द्वारा फर्जी या गलत घोषित कर निरस्त किया जा चुका है, उनके मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाए। खास तौर पर जिन मामलों में न्यायालय का स्थगन आदेश (स्टे) लागू नहीं है, उनमें सेवा समाप्त करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

सभी विभागों से मांगी गई एकीकृत रिपोर्ट

सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को पत्र जारी कर अपने अधीनस्थ कार्यालयों और जिलों से संबंधित जानकारी जुटाने को कहा है। रिपोर्ट में यह जानकारी देनी होगी कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई है, कितने मामलों में सेवा समाप्त की गई और किन मामलों में कार्रवाई लंबित है। सभी विभागों को जानकारी एकत्र कर सामान्य प्रशासन विभाग तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

758 शिकायतों में 659 मामलों की जांच पूरी

उपलब्ध जांच रिपोर्ट के अनुसार, राज्य गठन के बाद से फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी से जुड़े 758 शिकायतें सामने आईं। इनमें से 659 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है। जांच में 267 अधिकारियों-कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इनमें से बड़ी संख्या में मामलों में न्यायालय से स्थगन आदेश प्रभावी होने के कारण सेवा समाप्ति की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है।

स्टे वाले मामलों में भी रिकॉर्ड अपडेट होगा

बताया गया है कि प्रमाणित फर्जी मामलों में अधिकांश प्रकरणों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का स्थगन आदेश लागू है। ऐसे मामलों में अदालत के आदेश के कारण बर्खास्तगी की कार्रवाई प्रभावित हुई है। वहीं, जिन प्रकरणों में कोई स्टे नहीं है, उनमें सरकार ने कार्रवाई आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।

पहले भी जारी हो चुके हैं कई निर्देश

सामान्य प्रशासन विभाग ने 11 अगस्त 2026 को जारी पत्र में इस मामले को लेकर पहले जारी किए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया है। विभाग के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 के बीच फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों में कार्रवाई को लेकर कई परिपत्र और अनुस्मारक जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई विभागों से कार्रवाई की अद्यतन जानकारी नहीं मिलने पर अब दोबारा प्राथमिकता के आधार पर रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार के ताजा निर्देशों के बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी सेवा में पहुंचे लोगों के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

 
 


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