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नई ऋण नीति में बड़ा बदलाव, 70% कैश और 30% सामग्री के रूप में मिलेगा लोन

नई ऋण नीति में बड़ा बदलाव, 70% कैश और 30% सामग्री के रूप में मिलेगा लोन

छत्तीसगढ़ में किसानों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई ऋण वितरण नीति लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव ऋण के नकद और वस्तु के अनुपात में किया गया है, जिससे किसानों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है।

नई नीति के तहत अब किसानों को स्वीकृत ऋण राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा नकद रूप में दिया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत खाद, बीज और कीटनाशक जैसी आवश्यक सामग्रियों के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पहले तक यह अनुपात 60 प्रतिशत नकद और 40 प्रतिशत वस्तु का था, जिसके कारण किसानों को नकद की कमी का सामना करना पड़ता था।

खेती के खर्चों में मिलेगी राहत

नकद हिस्से में बढ़ोतरी होने से किसानों को खेती से जुड़े जरूरी खर्चों को पूरा करने में आसानी होगी। मजदूरी, जुताई, सिंचाई और अन्य कामों के लिए अब उनके पास अधिक नकद राशि उपलब्ध रहेगी।

इस बदलाव से किसानों को अपनी जरूरतों के अनुसार खर्च करने की स्वतंत्रता भी मिलेगी, जिससे खेती का काम अधिक सुचारू रूप से किया जा सकेगा।

प्रति हेक्टेयर ऋण सीमा तय

बैंक द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, धान की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर ऋण सीमा निर्धारित की गई है।

सिंचित धान के लिए 66 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर
असिंचित धान के लिए 49 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर

इसी आधार पर किसानों को नए अनुपात में ऋण दिया जाएगा।

जिलों के अनुसार अलग-अलग प्रावधान

राज्य के विभिन्न जिलों के लिए ऋण की अधिकतम सीमा अलग-अलग तय की गई है। रायपुर, गरियाबंद, बलौदाबाजार, महासमुंद और धमतरी जैसे जिलों में अधिकतम सीमा 66 हजार रुपये रखी गई है। वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कुछ क्षेत्रों में यह सीमा 60 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।

समितियों को दिए गए निर्देश

ऋण वितरण प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए सहकारी समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसानों का पूरा विवरण निर्धारित प्रारूप में तैयार कर समयसीमा के भीतर बैंक शाखाओं में प्रस्तुत करें।

इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध हो और किसी प्रकार की देरी न हो।

किसानों की मांग का मिला परिणाम

काफी समय से किसान संगठन नकद हिस्से को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि खेती के कई ऐसे खर्च होते हैं, जिनके लिए नकद जरूरी होता है।

अब इस नई व्यवस्था के लागू होने से किसानों की यह मांग पूरी हो गई है, जिससे उनमें संतोष का माहौल है।

ऋण लेने के लिए जरूरी दस्तावेज

किसानों को ऋण प्राप्त करने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जिनमें शामिल हैं:

बी-1 की नकल
ऋण पुस्तिका
किसान क्रेडिट कार्ड (पासबुक)
चेकबुक इन दस्तावेजों के आधार पर ही ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।


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