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Indore Nagar Nigam: इंदौर नगर निगम में 'वंदे मातरम' पर संग्राम, कांग्रेस पार्षद निष्कासित

Indore Nagar Nigam: इंदौर नगर निगम में 'वंदे मातरम' पर संग्राम, कांग्रेस पार्षद निष्कासित

Indore Nagar Nigam: इंदौर नगर निगम का बजट सत्र बुधवार को हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन में 'वंदे मातरम' के गायन और नारों को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद सभापति ने कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम को पूरे दिन की कार्यवाही से निष्कासित कर सदन से बाहर कर दिया।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

बजट सत्र के दौरान भाजपा पार्षद महेश बसवाल ने सदन में 'वंदे मातरम' का नारा लगाया। इस पर कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख ने आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति के बाद बहस तब और बढ़ गई जब बसवाल ने तंज कसते हुए पूछा, "कल जब सदन में वंदे मातरम का सामूहिक गायन हो रहा था, तब आप गायब क्यों थीं?"

"हम नहीं गाते, इसलिए नहीं आते"

बसवाल के सवाल पर फौजिया शेख ने सदन में ही दोटूक कहा कि वे वंदे मातरम नहीं गातीं, इसीलिए उस समय सदन में मौजूद नहीं रहतीं। इस बयान के बाद भाजपा पार्षदों ने 'राष्ट्र विरोधी' नारेबाजी का आरोप लगाते हुए सभापति का घेराव कर दिया और फौजिया शेख के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

सभापति का कड़ा एक्शन

हंगामे को देखते हुए सभापति ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने फौजिया शेख को 10 मिनट के भीतर सदन से बाहर जाने का आदेश दिया और पूरे दिन की कार्यवाही में उनके शामिल होने पर रोक लगा दी। सभापति के इस फैसले का भाजपा पार्षदों ने मेजें थपथपाकर स्वागत किया।

फौजिया का बयान 

सदन से बाहर किए जाने के बाद फौजिया शेख अलीम ने मीडिया से चर्चा करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के किसी भी एक्ट में वंदे मातरम गाने की अनिवार्यता नहीं है। "हमारे इस्लाम धर्म में वंदे मातरम बोलना जायज नहीं है, इसलिए हम इसे नहीं गाते। यह हमारी धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है।"

सियासी उबाल

इस घटना के बाद इंदौर की राजनीति गरमा गई है। भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति और गौरव से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि भाजपा जानबूझकर बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवाद पैदा कर रही है। फिलहाल बजट सत्र की कार्यवाही भारी तनाव के बीच जारी है।


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