छत्तीसगढ़ सरकार ने इस साल शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा लागू की। इसके तहत छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों को एक ही तारीख पर परीक्षा कराने के निर्देश दिए गए। सरकार की इस सख्ती के बाद कई निजी स्कूलों की हकीकत सामने आने लगी।
सीजी बोर्ड की मान्यता, पढ़ाई CBSE की
जांच में सामने आया कि कई प्राइवेट स्कूल सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर छात्रों को CBSE के नाम पर एडमिशन दे रहे थे। ये स्कूल अंग्रेजी माध्यम के नाम पर पालकों को भ्रमित कर रहे थे और मोटी फीस वसूल कर रहे थे, जबकि उनकी आधिकारिक मान्यता केवल सीजी बोर्ड की थी।
हाईकोर्ट ने खारिज की स्कूलों की याचिका
सरकार के इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए साफ निर्देश दिया कि सभी स्कूलों को राज्य सरकार के नियमों का पालन करना होगा।
हजारों स्कूलों पर फर्जीवाड़े के आरोप
प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल सामने आए हैं, जो सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई तो कराते हैं, लेकिन अभिभावकों को CBSE स्कूल बताकर गुमराह करते हैं। इस तरह के स्कूलों में नर्सरी से लेकर आठवीं तक पढ़ाई कराई जाती है और एडमिशन के दौरान भारी फीस वसूली जाती है।
शिक्षा माफिया पर कार्रवाई नहीं
बताया जा रहा है कि पिछले एक साल में शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों को इस तरह की शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। इससे शिक्षा माफियाओं का हौसला बढ़ा और बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए।
आरंग से शुरू हुआ मामला, अब पूरे प्रदेश में खुलासा
आरंग के कृष्णा पब्लिक स्कूल का मामला सामने आने के बाद यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। यहां छात्रों को CBSE का हवाला देकर एडमिशन दिया गया, लेकिन परीक्षा के समय CG बोर्ड की प्रक्रिया अपनाने का दबाव डाला गया। सरकार की सख्ती के बाद अब रायपुर, बिलासपुर समेत कई शहरों में ऐसे मामलों का खुलासा हो रहा है।
हाईकोर्ट में PIL, 1784 स्कूलों की सूची पेश
रायपुर निवासी विकास तिवारी ने इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की है।याचिका में 1784 ऐसे स्कूलों की सूची कोर्ट में पेश की गई है, जो कथित रूप से गलत जानकारी देकर एडमिशन के नाम पर फीस वसूल रहे हैं। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी मांगी है।