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Maihar Alha Talab: मैहर का रहस्यमयी आल्हा तालाब और अखाड़ा

Maihar Alha Talab: मैहर का रहस्यमयी आल्हा तालाब और अखाड़ा

प्रमोद कुशवाहा, मैहर: मैहर की पहचान सिर्फ मां शारदा धाम से नहीं, बल्कि उस रहस्यमयी स्थल से भी है जहां आज भी वीर योद्धा आल्हा और ऊदल की अमर गाथा जीवंत मानी जाती है। मां शारदा मंदिर की तलहटी में स्थित आल्हा तालाब और अखाड़ा आस्था, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम है। मान्यता है कि मां शारदा के परम भक्त आल्हा आज भी सबसे पहले माता के दर्शन और पूजा करने आते हैं। आखिर क्या है इस स्थल का इतिहास और इससे जुड़ी मान्यताएं, देखिए हमारी विशेष रिपोर्ट।

जंगलों में धाम की खोज

बुंदेलखंड की लोकगाथाओं के अमर नायक आल्हा और ऊदल को मां शारदा का अनन्य भक्त माना जाता है। जनश्रुतियों के अनुसार दोनों वीरों ने घने जंगलों के बीच मां शारदा धाम की खोज की थी। कहा जाता है कि आल्हा ने यहां कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर मां शारदा ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। यही वजह है कि आज भी आल्हा की वीरता और भक्ति की कथाएं पूरे बुंदेलखंड में सुनाई जाती हैं।

आल्हा तालाब और अखाड़ा

मां शारदा मंदिर के पीछे स्थित आल्हा तालाब और अखाड़ा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि इसी अखाड़े में आल्हा और ऊदल युद्ध कला तथा कुश्ती का अभ्यास करते थे। यहां स्थित आल्हा मंदिर, उनकी प्रतिमा तथा उनसे जुड़ी तलवारें और अन्य प्रतीक आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं।

आल्हा करते है पहली पूजा

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मां शारदा की पहली पूजा आज भी आल्हा ही करते हैं। कहा जाता है कि मंदिर के कपाट खुलने से पहले पूजा-अर्चना के संकेत दिखाई देते हैं। हालांकि यह लोकआस्था और विश्वास का विषय है, लेकिन इसी मान्यता ने आल्हा तालाब और अखाड़े को रहस्य और श्रद्धा का अद्भुत केंद्र बना दिया है। आस्था, इतिहास और वीरता की अमर गाथा को समेटे मैहर का आल्हा तालाब और अखाड़ा आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। चाहे इसे लोककथा माना जाए या अटूट विश्वास, लेकिन यह स्थल आज भी मां शारदा के भक्त वीर आल्हा की अमर कहानी को जीवंत बनाए हुए है।


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