अंबिकापुर। ग्राम पंचायत कतकालो के किसानों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत की खबर सामने आई है। पंचायत में विद्युतीकरण विस्तार योजना के तहत नए ट्रांसफार्मर की स्थापना कर दी गई है। इससे क्षेत्र के करीब 100 किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। बिजली उपलब्ध होने के बाद लगभग 300 एकड़ कृषि भूमि में विद्युत पंप के जरिए सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।
फीता काटकर नए ट्रांसफार्मर का शुभारंभ
कतकालो में स्थापित नए ट्रांसफार्मर का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने फीता काटकर और बल्ब जलाकर किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य पायल सिंह तोमर, बिजली विभाग के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
नए ट्रांसफार्मर की स्थापना के साथ अब किसानों के खेतों तक बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया को गति मिलेगी। ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित सुविधा बताया।
डीजल पंप पर निर्भरता होगी कम
कतकालो के किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सिंचाई के लिए बिजली की सुविधा का अभाव था। बिजली नहीं होने के कारण उन्हें खेतों में पानी पहुंचाने के लिए डीजल पंप का इस्तेमाल करना पड़ता था। डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते खेती की लागत भी बढ़ रही थी।
ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायत चुनाव के दौरान किसानों ने खेतों तक बिजली पहुंचाने की मांग जिला पंचायत सदस्य पायल सिंह तोमर के सामने रखी थी। अब ट्रांसफार्मर लगने के बाद किसान बिजली कनेक्शन लेकर अपने खेतों में पंप स्थापित कर सकेंगे।
100 किसानों और 300 एकड़ खेतों को फायदा
नए ट्रांसफार्मर से करीब 100 किसानों के 300 एकड़ खेतों में बिजली से चलने वाले पंप के जरिए सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे किसानों को डीजल पर होने वाले खर्च से राहत मिलेगी और कृषि लागत कम होने की उम्मीद है।
बिजली आधारित सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन में भी खेती करने में मदद मिलेगी। इससे फसल उत्पादन बढ़ाने और कृषि गतिविधियों को विस्तार देने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
किसानों ने जताया आभार
विद्युतीकरण की मांग पूरी होने पर क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने खुशी जताई। ग्रामीणों ने जिला पंचायत सदस्य पायल सिंह तोमर और युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर के प्रति आभार व्यक्त किया।
किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए बिजली मिलने से खेती पहले की तुलना में आसान होगी। साथ ही डीजल पर निर्भरता कम होने से कृषि लागत में कमी आएगी, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है।