नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल जारी है। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बढ़ते टकराव के कारण तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इसी बीच भारत के लिए एक अहम मौका सामने आया है, लेकिन इसके साथ कुछ मुश्किल शर्तें भी जुड़ी हुई हैं।
भारत को मिला ईरानी तेल खरीदने का मौका
अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी ढील के बाद भारत को एक बार फिर ईरानी तेल खरीदने का विकल्प मिला है। करीब 2019 के बाद पहली बार भारत के सामने यह अवसर आया है, जब वह ईरान से तेल आयात कर सकता है।
ब्रेंट क्रूड से महंगा ऑफर
हालांकि, इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक ईरान भारत को जो तेल ऑफर कर रहा है, उसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड से 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल अधिक बताई जा रही है। ऐसे में यह डील भारतीय रिफाइनरियों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
पेमेंट को लेकर सख्त शर्त
ईरान की सरकारी और निजी तेल कंपनियां इस डील के लिए डॉलर में भुगतान की मांग कर रही हैं। हालांकि कुछ कंपनियां भारतीय रुपये में भुगतान स्वीकार करने को तैयार हैं, लेकिन अधिकतर लेनदेन डॉलर में ही करने की शर्त रखी गई है। इसके अलावा, एक और बड़ी शर्त यह है कि तेल की खेप पहुंचने के 7 दिनों के भीतर पूरा भुगतान करना होगा।
SWIFT सिस्टम से बाहर ईरान
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती पेमेंट सिस्टम को लेकर है। ईरान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क SWIFT से बाहर है, जिससे भुगतान प्रक्रिया जटिल हो जाती है। यही वजह है कि भारतीय रिफाइनरियां किसी भी समझौते से पहले वित्तीय सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं।
होर्मुज संकट से सप्लाई प्रभावित
पिछले कुछ हफ्तों से जारी संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक है, जिससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
LPG संकट भी बढ़ा
केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि भारत को रसोई गैस (LPG) की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ईरान से आयात एक राहत दे सकता है, लेकिन ऊंची कीमत और सख्त शर्तें इस विकल्प को जटिल बना रही हैं।
30 दिनों की अस्थायी छूट
अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों की सीमित छूट दी है। इस दौरान पहले से समुद्र में मौजूद तेल कार्गो को खरीदा जा सकता है। यह छूट समय-सीमित है, जिससे भारत को जल्द निर्णय लेना होगा। ऊर्जा संकट के इस दौर में भारत के पास विकल्प तो मौजूद हैं, लेकिन हर विकल्प के साथ जोखिम और लागत जुड़ी हुई है। ईरान का महंगा तेल और कड़े पेमेंट नियम भारत के लिए एक कठिन संतुलन की स्थिति पैदा कर रहे हैं।