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Amit Shah Rewa : गृहमंत्री अमित शाह ने देखा प्राकृतिक खेती का मॉडल, लोगों से की बड़ी अपील

Amit Shah Rewa : गृहमंत्री अमित शाह ने देखा प्राकृतिक खेती का मॉडल, लोगों से की बड़ी अपील

दिनेश दहिया, रीवा : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुरुवार को मध्यप्रदेश के रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा क्षेत्र स्थित बसामन मामा गौवंश वन विहार पहुंचे। यहां उन्होंने प्राकृतिक खेती प्रकल्प का विधिवत शुभारंभ किया और करीब 9 हजार गायों के बीच विकसित किए गए प्राकृतिक खेती के अनूठे मॉडल का अवलोकन किया। इस अवसर पर आयोजित किसान सम्मेलन को भी उन्होंने संबोधित किया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

अटल बिहारी वाजपेयी को किया नमन

सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है। उन्होंने अटल जी को नमन करते हुए कहा कि उनका रीवा से विशेष लगाव रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जब अटल जी प्रधानमंत्री थे, तब रीवा निवासी विजय बहादुर सिंह उनके चालक हुआ करते थे और वे उनसे बघेली भाषा में संवाद करते थे।

प्राकृतिक खेती को बताया भविष्य 

अमित शाह ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि रीवा में एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट और बसामन मामा गोधाम प्राकृतिक खेती का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। यहां गाय के गोबर से बिना रासायनिक खाद के खेती की जा रही है, जिसमें दलहन, चावल, चना और सरसों जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस मॉडल को बड़े स्तर पर प्रकल्प के रूप में विकसित किया जाए, तो विंध्य क्षेत्र के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने बताया कि एक देशी गाय से लगभग 21 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा सकती है।

सेहत और धरती दोनों के लिए जरूरी

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता बनाए रखती है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने जानकारी दी कि देश में अब तक 40 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती को अपना चुके हैं और उन्होंने स्वयं भी अपने खेत में इसका प्रयोग किया है।

पीपल के वृक्ष लगाने की अपील

अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने कहा कि धरती को मां कहा जाता है, उसे कंक्रीट में बदलना उचित नहीं है। उन्होंने पीपल के वृक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी नागरिकों से कम से कम पांच पीपल के पेड़ लगाने और प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लेने की अपील की।


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