छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में धान भंडारण को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़ी मात्रा में धान की कमी सामने आ रही है और कई स्थानों पर धान को चूहों द्वारा नुकसान पहुंचाने की खबरें मिल रही हैं। इस मुद्दे को लेकर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन में स्थगन प्रस्ताव पेश कर चर्चा की मांग की।
हालांकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह तक पहुंच गए। बाद में नियमों के तहत कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाया मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि प्रदेश में किसानों से खरीदे गए धान के भंडारण को लेकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कई जगहों से यह जानकारी मिल रही है कि संग्रहण केंद्रों में रखा धान चूहों द्वारा खाया जा रहा है।
उन्होंने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि किसानों की मेहनत से पैदा हुआ धान यदि सुरक्षित नहीं है तो यह सरकार की बड़ी विफलता है। इसलिए सदन के सभी काम रोककर इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए।
विपक्षी विधायकों ने भी उठाई चर्चा की मांग
विपक्ष के अन्य विधायकों ने भी नेता प्रतिपक्ष के स्थगन प्रस्ताव का समर्थन किया। विधायक उमेश पटेल ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों से धान को नुकसान होने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि धान का सही तरीके से भंडारण नहीं किया गया तो इससे किसानों और सरकारी खजाने दोनों को नुकसान हो सकता है।
भूपेश बघेल ने सरकार पर लगाए आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सुशासन का दावा करने वाली सरकार के कार्यकाल में धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 22 लाख 71 हजार क्विंटल धान की कमी नजर आ रही है और यह धान अब तक जमा नहीं हुआ है। इससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है।
बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि जिम्मेदारी से बचने के लिए सरकारी कर्मचारी चूहों को दोष दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई जिलों से धान को “मुसवा” यानी चूहों द्वारा खाए जाने की जानकारी सामने आ रही है।
सरकार ने आरोपों को बताया निराधार
विपक्ष के आरोपों पर खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में धान खरीदी और भंडारण की व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में करीब 25 लाख किसानों से 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया है और इसके लिए किसानों को 46 हजार 277 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
मंत्री ने कहा कि फिलहाल करीब 67 हजार टन धान संग्रहण केंद्रों में सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धान को चूहों द्वारा खाए जाने की बात पूरी तरह गलत और भ्रामक है। मंत्री ने बताया कि इस मामले में 78 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और जांच की प्रक्रिया जारी है।
स्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद बढ़ा हंगामा
सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में लगातार हंगामा किया और स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग दोहराई। लेकिन सभापति ने नियमों का हवाला देते हुए विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य घोषित कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह में पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।
हंगामे के बीच कांग्रेस विधायक निलंबित
गर्भगृह में प्रदर्शन और नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। स्थिति को देखते हुए सभापति ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस विधायकों को स्वमेव निलंबित घोषित कर दिया। धान भंडारण और कथित कमी का मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।