Gwalior High Court: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में प्रशासनिक अधिकारियों की पेशी और सरकारी तंत्र के बीच समन्वय की कमी का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल को दो अलग-अलग मामलों में जमानती वारंट के जरिए तलब किया गया था, जिसके बाद वे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए।
सरकारी वकील ने ली जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान उस वक्त स्थिति स्पष्ट हुई जब सरकारी वकील ने कोर्ट के सामने अपनी गलती स्वीकार की। सरकारी वकील ने बताया कि कोर्ट के आदेश की जानकारी प्रमुख सचिव को समय पर नहीं भेजी जा सकी थी, जिसके कारण देरी हुई। वकील ने स्पष्ट किया कि आदेश के पालन में हुई इस देरी के लिए प्रमुख सचिव व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं हैं। शासन की ओर से 2019 से लंबित मामले में जवाब प्रस्तुत कर दिया गया है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद की जाएगी।
पेंशन के लिए 5 साल का इंतजार
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सेवानिवृत्त मेडिकल ऑफिसर की पत्नी शीला त्रिपाठी की पेंशन से संबंधित था। याची के पति 2014 में रिटायर हुए थे और 2017 में उनका निधन हो गया। मृत्यु के बाद भी पेंशन और अन्य लाभ न मिलने पर 2019 में याचिका दायर की गई थी। अवमानना याचिका पर प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल ने अपना पक्ष रखा। उनके जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने याचिका को निराकृत कर दिया है। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य आयुक्त धनराजू एस (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) और ग्वालियर सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
प्रमुख सचिव भी हुए पेश
स्वास्थ्य विभाग के अलावा पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह भी कोर्ट के समक्ष पेश हुए। विभाग से जुड़े कई पुराने मामलों में हाई कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि लंबित आदेशों का पालन जल्द कर दिया जाएगा। कोर्ट ने उनके जवाबों को रिकॉर्ड पर लेते हुए संबंधित सभी याचिकाओं का निराकरण कर दिया।