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छत्तीसगढ़ में फूड पार्क योजना पटरी से उतरी: करोड़ों की जमीन खाली, कई जगह बदल रहा इस्तेमाल

छत्तीसगढ़ में फूड पार्क योजना पटरी से उतरी: करोड़ों की जमीन खाली, कई जगह बदल रहा इस्तेमाल

छत्तीसगढ़ में हर ब्लॉक में फूड पार्क स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना अब सुस्ती का शिकार होती नजर आ रही है। पूर्व सरकार ने इस योजना के तहत 22 जिलों के 53 ब्लॉकों में करीब 1500 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। इनमें से 18 स्थानों पर फूड पार्क स्थापित करने के लिए 132 करोड़ रुपए की प्रशासनिक मंजूरी भी दी गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाई।

कई फूड पार्क अधूरे, प्रसंस्करण इकाइयों की कमी

अब तक 18 में से 14 स्थानों पर फूड पार्क तो स्थापित कर दिए गए हैं और कुछ जगहों पर फल-सब्जी प्रसंस्करण का काम भी शुरू हुआ है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर इकाइयों की कमी साफ दिखाई दे रही है। पर्याप्त निवेशक और उद्योग नहीं आने से कई फूड पार्क अधूरे पड़े हैं या उनकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा।

9 फूड पार्क में बदली जा रही रणनीति

स्थिति को देखते हुए उद्योग विभाग और सीएसआईडीसी ने 9 फूड पार्कों में फूड प्रोसेसिंग के बजाय अन्य उद्योगों को अनुमति देने का फैसला लिया है। इन स्थानों पर अब राइस मिल, दाल मिल, फ्लोर मिल और अन्य छोटे उद्योग लगाए जा रहे हैं। संबंधित जिलों के कलेक्टरों ने भी इसकी मंजूरी दे दी है।

धमतरी के बागोद, सरगुजा के रिखी, रायपुर के खपरीखुर्द और मुंगेली के बिरबिरा जैसे क्षेत्रों में नए उद्योगों के लिए जमीन का आवंटन शुरू हो चुका है, जबकि अन्य पांच स्थानों पर प्रक्रिया जारी है।

14 ब्लॉकों में उत्पादन शुरू, लेकिन सीमित स्तर पर

उद्योग विभाग के अनुसार राज्य में 14 फूड पार्क सक्रिय हैं, जिनमें सुकमा (3), बस्तर (1), सरगुजा और जशपुर (2-2) के अलावा कांकेर, राजनांदगांव, कोरिया, रायपुर, गरियाबंद, सूरजपुर, मुंगेली और धमतरी शामिल हैं। हालांकि इनमें से कई फूड पार्क छोटे स्तर पर संचालित हो रहे हैं और उत्पादन इकाइयों की संख्या सीमित है।

किसानों को नहीं मिल रहा पूरा फायदा

इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज—जैसे टमाटर, मिर्च, फल और सब्जियों—का उचित मूल्य दिलाना था। लेकिन फूड पार्कों के अधूरे क्रियान्वयन के कारण किसानों की समस्या जस की तस बनी हुई है। कई बार किसानों को उचित दाम न मिलने पर अपनी उपज नष्ट करनी पड़ती है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

करोड़ों की जमीन बेकार पड़ी

राज्य के कई ब्लॉकों में फूड पार्क के लिए अधिग्रहित सैकड़ों एकड़ जमीन अभी भी खाली पड़ी है। प्रसंस्करण इकाइयों के अभाव में इन जमीनों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। अब उद्योग विभाग इन जमीनों के वैकल्पिक उपयोग पर भी विचार कर रहा है।

योजना पर फिर से मंथन की जरूरत

फूड पार्क योजना का उद्देश्य कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस योजना पर पुनर्विचार और ठोस रणनीति की जरूरत महसूस की जा रही है।

 

 


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