छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के थाना क्षेत्र अंतर्गत रेटावंड गांव में धर्म प्रचार को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। पिछले दो दिनों से चल रहे तनाव ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीणों और कथित पास्टर पक्ष के बीच मारपीट की स्थिति बन गई। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल फैल गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
धर्म प्रचार के आरोप से बढ़ा तनाव
मिली जानकारी के अनुसार, ओडिशा के नवरंगपुर से आया एक परिवार कुछ समय से गांव में रह रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि यह परिवार गांव में रहकर ईसाई धर्म का प्रचार कर रहा था, जिससे स्थानीय माहौल प्रभावित हो रहा था। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने से गांव में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
दोनों पक्षों ने दर्ज कराई शिकायत
घटना के बाद विशेष समुदाय के लोगों ने थाने पहुंचकर मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप लगाए। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध केवल इस बात को लेकर था कि बाहरी व्यक्ति गांव में स्थायी रूप से न रहे और धर्म प्रचार जैसी गतिविधियां बंद की जाएं।
पुलिस की समझाइश से मामला शांत
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों के साथ गांव के सरपंच, उपसरपंच और अन्य प्रमुख लोगों को थाने बुलाकर बैठक आयोजित की। इस दौरान आपसी सहमति से यह तय हुआ कि पास्टर किशोर भतरा अपनी बच्ची की परीक्षा समाप्त होने के बाद गांव छोड़ देगा और अन्य स्थान पर चला जाएगा। पुलिस की समझाइश के बाद फिलहाल माहौल शांत हो गया है।
गांव में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी संभावित विवाद को रोकने के लिए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि गांव में शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे।