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फर्जी फर्मों से ITC का खेल: कम आय वाले लोगों के नाम पर करोड़ों का कारोबार, GST जांच में सामने आई कहानी

फर्जी फर्मों से ITC का खेल: कम आय वाले लोगों के नाम पर करोड़ों का कारोबार, GST जांच में सामने आई कहानी

गिरीश केशरवानी/ मनोज नायक//रायपुर: छत्तीसगढ़ में फर्जी कंपनियां बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने के मामले की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। स्टेट जीएसटी की कार्रवाई में कारोबारी अमन अग्रवाल के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक दर्जन से ज्यादा फर्म बनाए जाने के साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर जिन लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कंपनियां बनाने में किया गया, उनमें सफाईकर्मी, मजदूर, चाय ठेला संचालक और ट्यूशन पढ़ाने वाले लोग भी शामिल हैं।

GST नोटिस मिलने के बाद लोगों को हुई जानकारी

मामले की जांच के दौरान जिन व्यक्तियों के नाम पर फर्म दर्ज होने की जानकारी सामने आई, उनमें से कुछ लोगों से संपर्क किया गया। उनका कहना है कि उन्हें अपने नाम पर कंपनी या कारोबार संचालित होने की जानकारी तब मिली, जब GST विभाग की ओर से नोटिस पहुंचा।

इन लोगों के मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग जरूरतों के लिए अपने आधार और पैन कार्ड की प्रतियां दूसरे लोगों को दी थीं। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना फर्म और बैंक खाते खोलने में किया गया।

144 करोड़ की फर्जी खरीद का दावा

GST जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच अलग-अलग जिलों में संचालित बताई गई बोगस फर्मों के जरिए करीब 144 करोड़ रुपए की फर्जी खरीद दिखाई गई।

जांच के मुताबिक, इन लेन-देन के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया और बाद में दूसरे कारोबारियों को ITC पास ऑन किया गया। इससे करीब 26 करोड़ रुपए के अवैध लाभ का आरोप सामने आया है।

दस्तावेज लेकर बनाए गए बैंक खाते और GST नंबर

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, फर्मों के लिए जिन लोगों की पहचान का इस्तेमाल किया गया, उनसे कथित तौर पर आधार और पैन कार्ड की प्रतियां हासिल की गईं। इसके बाद फर्जी हस्ताक्षर के जरिए बैंक खाते खोले गए और इन्हीं के आधार पर फर्मों का पंजीयन तथा GST नंबर लेने की प्रक्रिया पूरी की गई।

मामले में स्टेट जीएसटी की कार्रवाई के दौरान अमन अग्रवाल की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अब फर्जी दस्तावेजों से फर्म बनाए जाने के आरोपों को लेकर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है।

सफाईकर्मी के नाम पर करोड़ों का कारोबार

बिलासपुर के कोनी निवासी महेश फकीरा सोनी पेशे से सफाई कर्मचारी बताए गए हैं। जांच में उनके नाम पर हरीपुर में महावीर इंटरप्राइजेस नाम से फर्म दर्ज होने की जानकारी सामने आई।

दस्तावेजों के अनुसार, इस फर्म से अगस्त्य इंटरप्राइजेस को करीब 12.67 करोड़ रुपए की बिक्री दिखाई गई और इससे जुड़े लेन-देन में ITC ट्रांसफर का भी उल्लेख है।

चाय बेचने वाले के नाम पर फर्म

रायपुर के महादेवघाट रोड क्षेत्र में रहने वाले विकास यदु चाय का ठेला चलाने का काम करते हैं। उनके नाम पर दुर्ग जिले के पाटन में अगस्त्य इंटरप्राइजेस नाम से फर्म दर्ज होने की जानकारी जांच में सामने आई। यह मामला भी उन उदाहरणों में शामिल है, जहां कम आय वाले व्यक्ति के नाम पर बड़े कारोबारी लेन-देन दर्ज होने की बात सामने आई है।

मजदूर के नाम पर विनायक वेंचर्स

धमतरी निवासी प्रताप सिंह वर्मा मजदूरी करते हैं। जांच के अनुसार, उनके नाम पर दुर्ग-पाटन में विनायक वेंचर्स नाम से फर्म दर्ज थी। दस्तावेजों में अगस्त्य इंटरप्राइजेस को करीब 17.95 करोड़ रुपए की बिक्री दर्शाई गई और इससे संबंधित करीब 1.36 करोड़ रुपए के ITC हस्तांतरण का उल्लेख जांच में किया गया है।

12 हजार रुपए वेतन पाने वाले व्यक्ति के नाम पर 30 करोड़ से ज्यादा की खरीद

बैजनथापारा निवासी अफजल अंसारी का नाम भी इस मामले में सामने आया है। उनके नाम पर गरियाबंद में अंसारी ट्रेडर्स नाम से फर्म संचालित होने की जानकारी मिली। अंसारी के मुताबिक, उन्हें अपने नाम पर कंपनी चलने की जानकारी पिछले साल GST नोटिस मिलने के बाद हुई। जांच में इस फर्म से करीब 30.71 करोड़ रुपए की खरीद दिखाई गई थी। इसके एवज में करीब 5.52 करोड़ रुपए का ITC हस्तांतरण दर्ज होने की बात सामने आई है। अफजल अंसारी के अनुसार, वे शास्त्री मार्केट के सामने सुन्नी हन्फी ट्रस्ट की पार्किंग में करीब 12 हजार रुपए मासिक वेतन पर काम करते हैं।

ट्यूशन पढ़ाकर 12 से 15 हजार कमाने वाले के नाम पर फर्म

बोरियाकला निवासी हाफिज इसराइल भी इस मामले में सामने आए नामों में शामिल हैं। उनके मुताबिक, उन्हें पिछले साल पता चला कि उनके नाम पर फर्म बनाकर करोड़ों रुपए का कारोबार दर्ज किया गया है। हाफिज इसराइल घर-घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम करते हैं और उनकी मासिक आय करीब 12 से 15 हजार रुपए बताई गई है। उनका कहना है कि वे अमन अग्रवाल से कभी नहीं मिले और न ही उन्हें जानते हैं।

कागजों पर खरीद-बिक्री और ITC का पूरा खेल

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, अलग-अलग व्यक्तियों के दस्तावेजों के आधार पर फर्में तैयार की गईं। इन फर्मों के नाम पर कागजों में माल की खरीद दिखाई गई। इसके बाद उसी माल की आगे बिक्री दर्शाकर ITC का लाभ लिया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक कारोबार के बजाय दस्तावेजों में लेन-देन दिखाकर टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया और उसे दूसरी फर्मों तक पहुंचाया गया। GST जांच के अनुसार, इसी तरीके से सरकारी राजस्व को करीब 26 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों से फर्म बनाने और ITC के कथित दुरुपयोग से जुड़े इस मामले में अब पुलिस की एफआईआर के बाद जांच आगे बढ़ेगी। जांच में सामने आए दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।


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