Chhattisgarh NEET UG Counselling 2026: छत्तीसगढ़ में NEET UG काउंसलिंग के चौथे चरण में MBBS की 87 सीटों के आवंटन को लेकर विवाद सामने आया है। विद्यार्थियों और अभिभावकों ने सीट वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि कुल 87 सीटों में से राज्य के अभ्यर्थियों को केवल 4 सीटें मिलीं, जबकि 83 सीटें दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को आवंटित की गईं। इस मामले में अभिभावकों ने काउंसलिंग के नियमों, सीटों के संवर्ग परिवर्तन और चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। हालांकि, सीट आवंटन में गड़बड़ी और फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
NEET UG Counselling: 87 MBBS सीटों के आवंटन पर क्यों उठा विवाद?
छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों की MBBS सीटों के आवंटन को लेकर चौथे चरण की काउंसलिंग के बाद विवाद गहरा गया है। अभिभावकों का आरोप है कि सीट आवंटन के आंकड़ों में स्थानीय अभ्यर्थियों की हिस्सेदारी बेहद कम दिखाई दे रही है।
उनके मुताबिक, 87 सीटों में से प्रदेश के अभ्यर्थियों को केवल 4 सीटें मिलीं, जबकि शेष 83 सीटें बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को आवंटित हुईं।
इस कथित अंतर को लेकर अभिभावकों ने काउंसलिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। वे चाहते हैं कि संबंधित प्राधिकरण सीटों के आवंटन, उम्मीदवारों की पात्रता और आरक्षण से जुड़े नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट करे।
फिलहाल, 4 और 83 सीटों के आंकड़ों तथा आवंटन की पूरी प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि होना जरूरी है। केवल दूसरे राज्य के अभ्यर्थी होने से किसी उम्मीदवार का चयन नियमों के विरुद्ध नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित सीट के कोटे और लागू पात्रता नियमों की जांच आवश्यक है।
राजपत्र के नियम 8(1) को लेकर अभिभावकों ने उठाए सवाल
इस विवाद में छत्तीसगढ़ शासन के 14 जुलाई 2025 को प्रकाशित राजपत्र में दिए गए नियमों का हवाला दिया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि नियम 8(1) में आरक्षित सीटों के संवर्ग और श्रेणी में बदलाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
उनका आरोप है कि कुछ सीटों का संवर्ग परिवर्तन उस चरण में किए जाने के बजाय पहले ही कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार इसके लिए अलग प्रक्रिया निर्धारित थी।
इसके अलावा, निजी मेडिकल कॉलेजों की प्रबंधन कोटे की सीटों और NRI कोटे की खाली सीटों को दूसरे संवर्ग में समायोजित किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अभिभावकों की मांग है कि काउंसलिंग प्राधिकरण निम्नलिखित जानकारियां सार्वजनिक करे:
- प्रत्येक चरण में उपलब्ध MBBS सीटों की संख्या।
- काउंसलिंग के बाद खाली बची सीटों का पूरा विवरण।
- सीटों के संवर्ग या कोटे में बदलाव से संबंधित आदेश।
- अंतिम सीट आवंटन सूची और संबंधित अभ्यर्थियों की पात्रता का विवरण।
- आरक्षण और कोटा परिवर्तन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया।
इन दस्तावेजों के सामने आने से आरोपों की वास्तविकता और नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
SC-ST अभ्यर्थियों की संख्या में बढ़ोतरी का दावा
अभिभावकों ने काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि प्रक्रिया के दौरान अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के करीब 350 और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लगभग 750 नए अभ्यर्थी जुड़े।
इसके अलावा, स्थानीय निवासियों की संख्या में भी करीब एक हजार की वृद्धि होने की बात कही गई है।
अभिभावकों का कहना है कि इन आंकड़ों की जांच की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि काउंसलिंग में शामिल सभी उम्मीदवार निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं।
उन्होंने जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास प्रमाणपत्र और आवेदन के दौरान जमा किए गए अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराने की मांग की है।
हालांकि, अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने का दावा अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसकी पुष्टि काउंसलिंग के आधिकारिक आंकड़ों और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकती है।
बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की मांग
मामले में कुछ बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों द्वारा कथित रूप से गलत दस्तावेजों के जरिए राज्य कोटे का लाभ लेने के आरोप भी लगाए गए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि उम्मीदवारों के आवेदन फॉर्म, निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र और अन्य पात्रता दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।
हालांकि, फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी अभ्यर्थी की पात्रता पर निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड का सत्यापन जरूरी है।
यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से स्वतंत्र जांच की मांग
MBBS सीटों के आवंटन को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि चौथे चरण में आवंटित 87 सीटों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
वे चाहते हैं कि जांच के दौरान नियम 8(1) के पालन, सीटों के संवर्ग परिवर्तन, कोटा समायोजन और चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता की पड़ताल की जाए।
अभिभावकों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से किसी आदेश या जांच संबंधी निर्देश की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन कर सकते हैं।
उनका कहना है कि मेडिकल काउंसलिंग में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि MBBS में प्रवेश विद्यार्थियों के भविष्य और राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
फिलहाल, पूरे मामले में आधिकारिक सीट आवंटन के आंकड़े, लागू नियमों और पात्रता दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। संबंधित प्राधिकरण की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही विवाद से जुड़े आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।