रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के बीच सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने छह राज्यों के प्रदेश कांग्रेस प्रभारियों में फेरबदल करते हुए छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी झारखंड के कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत को सौंपी है। इसी बदलाव के बीच छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर नेताओं की सक्रियता और आपसी समीकरण भी चर्चा में आ गए हैं। दुर्ग जिले में चल रहे कांग्रेस के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता का एक अलग ही नजारा देखने को मिला। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणदास महंत और प्रेमसाय सिंह टेकाम समेत कई नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव को खास तवज्जो दी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सिंहदेव और अन्य वरिष्ठ नेता देवेंद्र यादव के साथ एक ही वाहन से रवाना हुए।
प्रशिक्षण शिविर में जुटे कांग्रेस के दिग्गज
दुर्ग जिले के बालोद रोड स्थित 36 फोर्ट रिसॉर्ट में 5 से 7 सितंबर तक कांग्रेस का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। शिविर में प्रदेश के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स को संगठनात्मक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत, प्रेमसाय सिंह टेकाम सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान नेताओं की मौजूदगी और उनके बीच हुई बातचीत ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रहे सियासी समीकरणों को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी।
देवेंद्र यादव के आवास पर भी हुई चर्चा
प्रशिक्षण शिविर खत्म होने के बाद करीब दोपहर 2 बजे देवेंद्र यादव के आवास पर भी नेताओं की मौजूदगी देखी गई। यहां भोजन के दौरान पार्टी की टीम के साथ संगठन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा हुई। टीएस सिंहदेव और चरणदास महंत जैसे वरिष्ठ नेताओं का देवेंद्र यादव के साथ एक वाहन में जाना पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बन गया। हालांकि नेताओं की ओर से इसे सामान्य आपसी संबंध और संगठनात्मक गतिविधियों का हिस्सा बताया गया।
भूपेश बघेल करीब आधे घंटे बाद हुए रवाना
शिविर में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कार्यक्रम में करीब आधे घंटे तक मौजूद रहे और इसके बाद वहां से रवाना हो गए। उनके जल्दी जाने को लेकर जब टीएस सिंहदेव से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि भूपेश जी को संभवत: कोई जरूरी काम रहा होगा, इसलिए वह चले गए। देवेंद्र यादव के साथ वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और यूथ कांग्रेस चुनाव के दौरान उनके साथ रहने को लेकर पूछे गए सवाल पर सिंहदेव ने इसे पुराने घरेलू संबंधों से जोड़ते हुए सहज अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके जैसे वरिष्ठ नेताओं की यूथ कांग्रेस चुनाव में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।
AICC के फैसले से बदली प्रदेश कांग्रेस की तस्वीर
AICC के ताजा संगठनात्मक फेरबदल में छत्तीसगढ़ के अलावा असम, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के प्रदेश कांग्रेस प्रभारियों में भी बदलाव किया गया है। छत्तीसगढ़ के नए प्रभारी सुखदेव भगत के सामने प्रदेश संगठन को एकजुट करने और पार्टी की जमीनी संरचना मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी। कांग्रेस लंबे समय से प्रदेश में संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।
आने वाले चुनावों पर रहेगी नजर
2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए संगठन को मजबूत करना अहम हो गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी राज्य की 11 सीटों में से केवल एक सीट जीत पाई थी। ऐसे में नए प्रदेश प्रभारी के सामने अलग-अलग स्तर पर सक्रिय नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना, ब्लॉक और जिला संगठनों को मजबूत करना तथा आगामी चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति तैयार करना प्रमुख चुनौती होगी। देवेंद्र यादव के साथ प्रशिक्षण शिविर में वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय मौजूदगी को इसी व्यापक संगठनात्मक कवायद के बीच देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर वास्तविक सियासी समीकरण किस दिशा में जाते हैं, यह आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकता है।