रायपुर: भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण मुआवजे में कथित गड़बड़ी के मामले में ईओडब्ल्यू और एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। अभनपुर के तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और गोबरा नवापारा के तत्कालीन नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को बुधवार को हिरासत में लिया गया। दोनों अधिकारी लंबे समय से फरार बताए जा रहे थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली।
विशेष न्यायालय से रिमांड
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने जांच एजेंसी को 20 फरवरी तक पूछताछ के लिए रिमांड प्रदान किया है। इससे पहले जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा जारी करवाई थी। फरारी के चलते संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया भी विशेष न्यायालय में लंबित है।
राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी
जांच एजेंसियों के अनुसार, रायपुर-विशाखापट्नम और दुर्ग बायपास भारतमाला सड़क परियोजना में जमीन अधिग्रहण के दौरान राजस्व दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। आरोप है कि अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और भूमाफिया के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। इसके जरिए भू-स्वामियों को वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक राशि दिलाई गई, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
43 करोड़ का मामला, कई आरोपी
इस प्रकरण में लगभग 43 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। मामले में पांच लोकसेवकों समेत कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर एनएचएआई के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिससे मुआवजा राशि में कथित रूप से हेराफेरी संभव हो सकी। घोटाले के उजागर होने के बाद 78 करोड़ रुपए के भुगतान का भी उल्लेख जांच में सामने आया है।
निलंबन और बहु-एजेंसी जांच
अभनपुर के तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, जो वर्तमान में कोरबा में डिप्टी कलेक्टर पद पर पदस्थ थे, उन्हें मामले के सामने आने के बाद निलंबित कर दिया गया था। इस पूरे प्रकरण की जांच ईओडब्ल्यू, एसीबी के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहा है। रिमांड अवधि के दौरान जांच एजेंसियां घोटाले से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन की परतें खोलने में जुटी हैं।