रायपुर: छत्तीसगढ़ में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (REAO) पद के लिए व्यापमं परीक्षा पास करने वाले 13 अभ्यर्थियों ने नौकरी से पहले होने वाली मूल प्रमाणपत्र जांच से दूरी बना ली। जैसे ही उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया, सभी 13 अभ्यर्थी गायब हो गए। इस मामले को लेकर पहले से जताया जा रहा संदेह अब सही साबित होता नजर आ रहा है।
बहरे बनकर आए थे, फर्जी प्रमाणपत्र का शक
इन अभ्यर्थियों पर आरोप है कि उन्होंने स्वयं को श्रवण बाधित (बहरे) दर्शाते हुए फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर चयन हासिल किया। हरिभूमि ने 18 जनवरी को प्रकाशित खबर में इस आशंका को प्रमुखता से उठाया था, जो अब सच साबित होती दिख रही है। दोबारा बुलाने के बावजूद कोई भी अभ्यर्थी सामने नहीं आया।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
राज्य में अब तक 153 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की गई। इनमें से कई आरोपी सुप्रीम कोर्ट की शरण भी ले चुके हैं। वहीं शासन-प्रशासन द्वारा ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है।
दिव्यांग संघ ने की सख्त कार्रवाई की मांग
छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ के प्रदेश अध्यक्ष बोहित राम चंद्राकर ने कहा कि उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि ये 13 अभ्यर्थी फर्जी प्रमाणपत्र धारी हो सकते हैं। अब जब वे जांच से फरार हो गए हैं, तो यह संदेह पुख्ता हो गया है। उन्होंने मांग की कि इन लोगों को किसी भी स्थिति में छोड़ा न जाए और उनके प्रमाणपत्रों की गहन जांच की जाए।
यह है पूरा मामला
राज्य सरकार के संचालनालय कृषि द्वारा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के 321 पदों पर सीधी भर्ती के लिए व्यापमं के माध्यम से परीक्षा आयोजित की गई थी। चयनित अभ्यर्थियों में से श्रवण बाधित श्रेणी के 14 उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए बुलाया गया था। इनमें से केवल एक ही उम्मीदवार उपस्थित हुआ, जबकि शेष 13 अनुपस्थित रहे।
समिति ने किया अपात्र घोषित
मूल प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बाद गठित समिति ने अनुपस्थित 13 अभ्यर्थियों को अपात्र घोषित कर दिया। साथ ही उन्हें 23 जनवरी तक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर दावा प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था, लेकिन निर्धारित तिथि तक भी कोई अभ्यर्थी सामने नहीं आया। इससे यह साफ हो गया कि प्रमाणपत्र फर्जी होने की आशंका सही थी।