पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर, बीना: बीना रिफाइनरी के नो डेवलपमेंट जोन में अवैध निर्माण की मनमानी एक बार फिर सुर्खियों में है। सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर प्लांट और अस्थाई आवास खड़े कर दिए गए हैं। प्रशासन अब सक्रिय हुआ है, लेकिन सवाल ये है, क्या इस बार सिर्फ नोटिस ही जारी होंगे या असली कार्रवाई भी होगी?
बीना रिफाइनरी से मात्र 5 किलोमीटर का पूरा क्षेत्र नो डेवलपमेंट जोन घोषित है, जबकि 1 किलोमीटर का क्षेत्र पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। फिर भी रिफाइनरी की सुरक्षा दीवार से सटाकर कई कंपनियों ने बिना किसी अनुमति के प्लांट लगा लिए और मजदूरों के लिए अस्थाई आवास बना लिए। NDZ कमिटी की अनुमति बिना लिए ये निर्माण किए गए, जबकि स्थानीय किसानों को खेत में भी छोटा-मोटा निर्माण करने के लिए बार-बार अनुमति लेनी पड़ती है।
स्थानीय ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के बार-बार ज्ञापन देने के बाद तहसीलदार अंबरपंथी ने 30 सितंबर तक सभी अवैध निर्माण हटाने के सख्त निर्देश दिए थे। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब प्रशासन ने एक बार फिर तेवर दिखाए हैं। करीब 40 कंपनियों को नोटिस जारी कर 25 जून तक अवैध निर्माण हटाने का अल्टीमेट दिया गया है। रिफाइनरी की सुरक्षा किसी भी तरह से compromise नहीं होनी चाहिए। सवाल ये है कि 25 जून के बाद क्या होगा? क्या प्रशासन सिर्फ नोटिस तक सीमित रहेगा या इस बार बुलडोजर भी चलेगा?
हालांकि मामले में सांसद लता वानखेड़े ने भी अवैध निर्माण को लेकर नाराजगी जताई थी और कार्रवाई की बात कही थी। मामले में एसडीएम रवि श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं। और नहीं हटने पर शक्ति से कार्रवाई की जाएगी।