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‘दूध की रखवाली में बिल्ली…’ : नशा विरोधी मुहिम में हनी सिंह की एंट्री पर बवाल, विपक्ष ने बीजेपी पर साधा निशाना

‘दूध की रखवाली में बिल्ली…’ : नशा विरोधी मुहिम में हनी सिंह की एंट्री पर बवाल, विपक्ष ने बीजेपी पर साधा निशाना

चंडीगढ़ में पंजाब बीजेपी की एक पहल ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। पार्टी ने लोकप्रिय गायक यो यो हनी सिंह को नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से जोड़ते हुए युवाओं से उन्हें प्रेरणा के तौर पर देखने की अपील की है। बीजेपी का कहना है कि हनी सिंह अब नशा छोड़ चुके हैं और युवाओं को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि इस फैसले पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

तरुण चुग से मुलाकात के बाद शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, हाल ही में हनी सिंह ने बीजेपी नेता तरुण चुग से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पंजाब में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में सहयोग देने की बात कही। इसके बाद तरुण चुग ने बयान दिया कि हनी सिंह स्वयं नशे की समस्या से बाहर निकल चुके हैं, इसलिए वे युवाओं के लिए एक उदाहरण बन सकते हैं।

कांग्रेस ने जताई नाराजगी

कांग्रेस ने इस पहल पर सवाल उठाते हुए इसे गलत संदेश बताया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि जिन कलाकारों के गानों को लेकर लंबे समय से नशे को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं, उन्हें इस तरह के अभियान का चेहरा बनाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि नशे के मुद्दे पर गंभीरता से काम करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी हो रही है।

आम आदमी पार्टी का विरोध

पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने भी बीजेपी की इस रणनीति की आलोचना की है। प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि वह ऐसे गानों और कलाकारों को समर्थन नहीं देते, जिन पर नशे को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे ऐसे लोगों से प्रेरणा न लें, बल्कि सकारात्मक रोल मॉडल को अपनाएं।

पंजाबी कलाकारों की प्रतिक्रिया

इस विवाद में पंजाबी गायक जसबीर जस्सी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह कदम ऐसा है जैसे किसी गलत उदाहरण को ही सुधार का प्रतीक बना दिया गया हो। उनका कहना है कि जिन कलाकारों पर पहले सवाल उठते रहे हैं, उन्हें ही नशा विरोधी अभियान से जोड़ना उचित नहीं है।

राजनीति और संस्कृति के बीच बहस तेज

हनी सिंह को इस अभियान से जोड़ने के बाद पंजाब में राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस तेज हो गई है। बीजेपी इसे युवाओं को जोड़ने और जागरूक करने की पहल बता रही है, जबकि विपक्ष इसे गलत संदेश देने वाला फैसला बता रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक तूल पकड़ सकता है।


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