राजेश सोनी, डबरा : कभी-कभी कुछ मिनटों का सही निर्णय किसी के जीवन की सबसे बड़ी खुशी बन जाता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण बुधवार को डबरा रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जहां भारतीय रेलवे और रेल सुरक्षा बल की सतर्कता ने एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की जान बचा ली।
दरअसल, गाड़ी संख्या 12617 मंगला एक्सप्रेस के जनरल कोच में यात्रा कर रही गर्भवती महिला को अचानक तेज़ प्रसव पीड़ा होने लगी। स्थिति गंभीर होती देख ट्रेन स्टाफ ने तत्काल उच्च अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया। जानकारी मिलते ही झांसी स्थित डिप्टी कंट्रोलर ने डबरा स्टेशन मास्टर को अलर्ट किया। स्टेशन प्रबंधन ने बिना समय गंवाए लोको पायलट से संपर्क कर ट्रेन को डबरा स्टेशन की मेन लाइन पर रुकवाया। साथ ही सार्वजनिक एलाउंस कर रेल सुरक्षा बल को सूचित किया गया।
आरपीएफ बनी जीवन रक्षक
आरपीएफ के सहायक उप निरीक्षक गिरिजेश कुमार, प्रधान आरक्षक दीपक कुमार, आरक्षक धर्मवीर सिंह और महिला आरक्षक नीतू रावत ने तत्परता दिखाते हुए महिला यात्री को सुरक्षित ट्रेन से उतारा। एंबुलेंस की प्रतीक्षा न करते हुए निजी संसाधनों से महिला को तुरंत सिविल अस्पताल डबरा पहुंचाया गया।
डॉक्टरों ने कराया प्रसव
सिविल अस्पताल में डॉक्टर स्वाति अग्रवाल और नर्सिंग स्टाफ अर्चना ने महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता दी। डॉक्टरों के अनुसार नवजात के गले में नाल फंसी हुई थी, जिससे मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा था। लेकिन समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण सुबह 10 बजकर 56 मिनट पर महिला ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। फिलहाल मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
परिवार को राहत, रेलवे की सराहना
महिला यात्री मंजेश, निवासी ग्राम रामनगर (तहसील मेहगांव, जिला भिंड), अपने पति पवन विश्वकर्मा के साथ कल्याण से ग्वालियर की यात्रा कर रही थीं। पति के पैर में पहले से प्लास्टर लगा हुआ था, ऐसे में यह सहयोग परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहा। यह घटना सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि रेलवे की मानवीय सोच और जिम्मेदारी का उदाहरण है। डबरा स्टेशन पर उस दिन सिर्फ ट्रेन ही नहीं रुकी, बल्कि समय थम गया और उसी पल एक नया जीवन इस दुनिया में सुरक्षित कदम रख सका।