हरिओम खरे, खजुराहो : सरकारी दस्तावेजों में नाम होना आज किसी के जिंदा होने की सबसे बड़ी पहचान बन गया है। लेकिन अगर यही दस्तावेज किसी को मृत घोषित कर दें, तो जिंदा इंसान भी सिस्टम के सामने बेबस हो जाता है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सामने आई यह खबर आधार कार्ड व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
खजुराहो के पास बमीठा थाना क्षेत्र के इमलहा गांव में रहने वाली गीता रैकवार गर्भवती हैं। घर में आने वाले नए मेहमान की तैयारी चल रही है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में गीता का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। आधार की वेबसाइट पर गीता रैकवार को मृत घोषित कर दिया गया है, जिसके चलते उनका आधार कार्ड सस्पेंड हो गया है।
मामला तब सामने आया जब गीता रैकवार अपने पति मंगलदीन रैकवार के साथ उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन के लिए आवेदन करने पहुंचीं। फॉर्म भरते समय आधार सत्यापन हुआ, और सिस्टम ने साफ बता दिया कि लाभार्थी तो सरकारी तौर पर मर चुकी है। योजना का लाभ मिलना तो दूर, पहले खुद को जिंदा साबित करने की सलाह दे दी गई।
परिवार जब आधार सेंटर पहुंचा तो वहां बताया गया कि गीता रैकवार का नाम मृत्यु कॉलम में दर्ज है। आधार कार्ड ही सस्पेंड है, इसलिए न सरकारी योजना, न इलाज और न ही किसी सुविधा का लाभ मिल सकता है। सुधार के नाम पर एक ही जवाब दिया गया कि मामला भोपाल या दिल्ली स्तर से ही ठीक होगा।
पिछले एक हफ्ते से गर्भवती महिला और उसका पति सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। कभी आधार सेंटर, कभी जनसेवा केंद्र और कभी ब्लॉक कार्यालय। हर जगह एक ही जवाब मिल रहा है, यहां से कुछ नहीं हो सकता। सवाल यह नहीं कि आधार रिकॉर्ड में इतनी बड़ी गलती कैसे हुई, सवाल यह है कि इसका खामियाजा एक गर्भवती महिला क्यों भुगते।
आखिरकार परेशान होकर दंपति ने बमीठा थाने में लिखित शिकायत दी। शिकायत में साफ लिखा गया है कि गीता रैकवार जिंदा हैं और उनका आधार कार्ड गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया है। अब उम्मीद है कि पुलिस रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए आधार में दर्ज मौत की एंट्री को हटाया जाएगा।
यह पहला मामला नहीं है जब आधार या सरकारी रिकॉर्ड में किसी जिंदा इंसान को मृत दिखाया गया हो। लेकिन फर्क इतना है कि यहां मामला एक गर्भवती महिला का है, जिसे सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। आधार की एक गलत एंट्री ने उसकी पूरी जिंदगी को कागजों में रोक दिया है।
सवाल सीधा है, जब आधार जैसे अहम दस्तावेज में जिंदा इंसान को मृत घोषित किया जा सकता है, तो आम आदमी किस सिस्टम पर भरोसा करे अब देखना यह है कि प्रशासन गीता रैकवार को आधार रिकॉर्ड में दोबारा कब जिंदा करता है,ताकि वह योजनाओं और इलाज का हक पा सके।