होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

सोनिया गांधी की 1980 की वोटर लिस्ट एंट्री पर फिर सुनवाई: दिल्ली कोर्ट ने पुराना आदेश रद्द किया

सोनिया गांधी की 1980 की वोटर लिस्ट एंट्री पर फिर सुनवाई: दिल्ली कोर्ट ने पुराना आदेश रद्द किया

नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से जुड़ा करीब चार दशक पुराना वोटर लिस्ट विवाद एक बार फिर अदालत पहुंच गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष अदालत ने उस मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोपों की जांच की मांग को खारिज कर दिया गया था।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट के पास भेजते हुए नए सिरे से दलीलें सुनने और कारणों के साथ नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

1980 की वोटर लिस्ट को लेकर क्या है विवाद?

मामला वर्ष 1980 की नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम होने के आरोप से जुड़ा है। शिकायतकर्ता की दलील है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की थी, जबकि उनका नाम इससे करीब तीन साल पहले यानी 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था।

याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि यदि नागरिकता 1983 में मिली, तो 1980 में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए कौन से दस्तावेज और प्रक्रिया अपनाई गई थी। हालांकि, ये सभी बातें शिकायत में लगाए गए आरोप और उठाए गए सवाल हैं। अदालत के मौजूदा आदेश का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं।

1982 में नाम हटने का भी किया गया उल्लेख

शिकायत में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था और बाद में 1982 में इसे हटा दिया गया। इसके बाद 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने के बाद नाम दोबारा मतदाता सूची में दर्ज होने की बात भी याचिका में कही गई है। इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की पुलिस जांच कराने और कथित दस्तावेजी गड़बड़ी की पड़ताल की मांग की थी।

मजिस्ट्रेट के पुराने आदेश पर कोर्ट ने क्यों उठाए सवाल?

विशेष अदालत ने सितंबर 2025 में दिए गए मजिस्ट्रेट के आदेश को पर्याप्त कारणों वाला नहीं माना। अदालत के मुताबिक, आदेश में शिकायत में लगाए गए आरोपों के संदर्भ में पर्याप्त न्यायिक विचार नहीं किया गया था।

कोर्ट ने खास तौर पर BNSS की धारा 175(3) के अनुपालन, संबंधित पुलिस अधिकारी की दलील सुनने और संबंधित थाने से स्थिति रिपोर्ट मंगाने जैसे पहलुओं का उल्लेख किया।

विशेष अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट को मुख्य रूप से यह देखना था कि शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध के होने का आधार बनता है या नहीं। कोर्ट के मुताबिक, इसके बजाय आदेश में नागरिकता के मुद्दे पर ज्यादा ध्यान चला गया।

अब मजिस्ट्रेट कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई

विशेष अदालत के आदेश के बाद मामला फिर मजिस्ट्रेट के पास लौट गया है। अब शिकायतकर्ता की दलीलें, पुलिस का पक्ष और उपलब्ध रिकॉर्ड नए सिरे से देखे जाएंगे। इसके बाद मजिस्ट्रेट को कानून के मुताबिक कारणों के साथ नया आदेश पारित करना होगा। फिलहाल अदालत ने आरोपों को सही या गलत ठहराने वाला कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

29 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होनी है। उस दिन आगे की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। फिलहाल इस पूरे मामले का केंद्र 1980 की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम दर्ज होने के आरोप, 1982 में नाम हटाए जाने के दावे और 1983 में नागरिकता हासिल करने से जुड़े दस्तावेजी सवाल हैं।


संबंधित समाचार