जांजगीर: छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले से जुड़ा बहुचर्चित बैंक घोटाले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू को सत्र न्यायालय ने बड़ी राहत देते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। जमानतदार पेश होने के बाद विधायक के आज शाम तक जिला जेल खोखरा से रिहा होने की उम्मीद है।
चार दिन बाद मिली राहत, समर्थकों में खुशी
विधायक बालेश्वर साहू को किसान के नाम पर फर्जीवाड़े के आरोप में 10 जनवरी को जेल भेजा गया था। वे बीते चार दिनों से न्यायिक हिरासत में थे। सत्र न्यायालय से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में राहत का माहौल देखा जा रहा है।
सीजेएम कोर्ट ने पहले किया था जेल रवाना
पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर दो संदूक दस्तावेजों के साथ चालान सीजेएम कोर्ट में पेश किया था। चालान की जांच के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक को 22 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। उसी दिन सीजेएम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी।
विधायक के जेल जाने से गरमाई राजनीति
बालेश्वर साहू के जेल जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में भी उबाल आ गया था। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांजगीर जिला जेल पहुंचकर विधायक से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया था।
क्या है पूरा विवाद, समझिए मामला
यह मामला 3 अक्टूबर 2025 को चांपा थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। आरोप है कि बालेश्वर साहू ने बम्हनीडीह को-ऑपरेटिव सोसायटी में प्रबंधक रहते हुए किसान राजकुमार शर्मा, उसकी मां और पत्नी के फर्जी हस्ताक्षर व अंगूठा निशान लगाकर बैंक से करीब 43 लाख रुपये की अवैध निकासी करवाई।
किसान के नाम पर KCC लोन, पैसा खुद के खाते में गया
शिकायतकर्ता राजकुमार शर्मा का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2020 के बीच विधायक ने उसे किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन लेने की सलाह दी। इसके लिए एचडीएफसी बैंक चांपा में खाता खुलवाया गया और ब्लैंक चेक लेकर करीब 24 लाख रुपये अपने और पत्नी के खाते में ट्रांसफर कर लिए गए। बाद में जांच में कुल 42 लाख 78 हजार रुपये के आहरण का मामला सामने आया।
गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज
पुलिस जांच में आरोप सही पाए जाने पर विधायक बालेश्वर साहू और विक्रेता गौतम राठौर के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 34 भादवि के तहत मामला दर्ज किया गया। विधायक ने पहले बिलासपुर हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले रखा था, जिसके चलते पुलिस ने बिना गिरफ्तारी के जांच पूरी की थी।