छत्तीसगढ़ में चिटफंड कंपनियों की धोखाधड़ी का असर आज भी हजारों परिवार झेल रहे हैं। धमतरी जिले में बड़ी संख्या में निवेशकों ने बेहतर रिटर्न और कम समय में रकम दोगुनी होने के लालच में अपनी बचत निवेश की थी, लेकिन अब वर्षों बाद भी उन्हें अपनी जमा पूंजी वापस नहीं मिल सकी है। जिले के 1 लाख 59 हजार से अधिक निवेशक कथित तौर पर सैकड़ों चिटफंड कंपनियों की ठगी का शिकार हुए हैं।
ऊंचे मुनाफे का लालच देकर जुटाया निवेश
बताया जाता है कि विभिन्न चिटफंड कंपनियों ने आकर्षक योजनाओं का प्रचार कर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया था। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हजारों लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई इन योजनाओं में जमा की। लेकिन निवेश अवधि पूरी होने के बाद कई कंपनियों ने भुगतान करने के बजाय अपने कार्यालय बंद कर दिए, जिससे निवेशकों को ठगी का एहसास हुआ।
वर्षों बाद भी न्याय की प्रतीक्षा
ठगी का मामला सामने आने के बाद प्रभावित लोगों ने प्रशासन के समक्ष दस्तावेजों के साथ दावे प्रस्तुत किए। हालांकि कई साल बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में प्रकरण अब भी न्यायिक प्रक्रिया में लंबित हैं। निवेशक लगातार प्रशासन और सरकार से राशि वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में अब तक समाधान नहीं निकल पाया है।
पुलिस कार्रवाई के बावजूद अधूरी राहत
मामले में पुलिस ने कई कंपनियों के संचालकों, प्रबंधकों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की। कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन निवेशकों को उनकी पूरी रकम वापस नहीं मिल सकी। कानूनी प्रक्रियाओं और संपत्तियों के निपटारे में लग रहे समय के कारण राशि वापसी की प्रक्रिया धीमी बनी हुई है।
सरकारों ने किए प्रयास, लेकिन चुनौती बरकरार
पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकारों ने चिटफंड मामलों के समाधान के लिए कई कदम उठाए हैं। कंपनियों की संपत्तियों की पहचान, कुर्की और नीलामी जैसी कार्रवाई भी की गई। इसके बावजूद ठगी गई कुल राशि की तुलना में वापस की गई रकम बेहद कम बताई जा रही है। कई निवेशक आज भी अपनी जमा पूंजी लौटने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
निवेशकों की एक ही मांग—कब मिलेगी मेहनत की कमाई?
धमतरी सहित प्रदेश के कई जिलों में चिटफंड पीड़ित वर्षों से न्याय और राशि वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लंबी कानूनी प्रक्रिया और सीमित राशि वापसी के बीच प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी जीवनभर की कमाई दांव पर लगी हुई है। ऐसे में उनकी सबसे बड़ी मांग यही है कि लंबित मामलों का जल्द निपटारा कर निवेशकों को राहत दिलाई जाए।