मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में वितरित मंगलसूत्रों को लेकर उठे विवाद पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग का कहना है कि योजना के दिशा-निर्देशों में चांदी का मंगलसूत्र देना अनिवार्य नहीं है। उपलब्ध बजट और बाजार दरों को ध्यान में रखते हुए लाभार्थियों को कृत्रिम (आर्टिफिशियल) मंगलसूत्र प्रदान किए गए थे।
सीमित बजट के कारण खरीदे गए कृत्रिम मंगलसूत्र
अधिकारियों के मुताबिक योजना के तहत निर्धारित वित्तीय सीमा के भीतर सामग्री क्रय की जाती है। इसी के तहत विवाह समारोह में शामिल नवविवाहिताओं को आर्टिफिशियल मंगलसूत्र वितरित किए गए थे। विभाग का दावा है कि सामग्री की खरीद शासन के निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार की गई थी।
गुणवत्ता में कमी मिलने पर हुई कार्रवाई
विभाग ने बताया कि बाद में वितरित मंगलसूत्रों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच के दौरान गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित आपूर्तिकर्ता फर्म के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र एक हजार रुपये की कटौती की गई। कटौती की गई राशि सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में जमा कराई गई है।
पात्र कन्याओं को मिली आर्थिक सहायता
अधिकारियों के अनुसार सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक पात्र कन्या को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। विवाह आयोजन और अन्य आवश्यक सामग्रियों पर नियमानुसार राशि खर्च की गई। विभाग का कहना है कि योजना के लाभार्थियों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई गई है।
अनियमितता के आरोपों को किया खारिज
महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन शासन के दिशा-निर्देशों, वित्तीय प्रावधानों और खरीद संबंधी नियमों का पालन करते हुए किया गया था। विभाग ने वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप संपन्न कराई गई है।