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बायोगैस प्लांट का विरोध, ग्रामीणों ने जमीन आवंटन रद्द करने की मांग उठाई

बायोगैस प्लांट का विरोध, ग्रामीणों ने जमीन आवंटन रद्द करने की मांग उठाई

राजनांदगांव। जिले के ग्राम पंचायत मड़ीपार के आश्रित ग्राम कुराडबरी में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट को लेकर ग्रामीणों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और प्लांट के लिए शासकीय भूमि आवंटित करने की चल रही प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है।

शासकीय जमीन आवंटन को लेकर जताई आपत्ति

ग्रामीणों के अनुसार कुराडबरी में स्थित शासकीय भूमि के खसरा नंबर 672 से 689 तथा खसरा नंबर 161 के एक हिस्से को बायोगैस कंपनी को दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी मामले को लेकर ग्रामीणों ने न्यायालय में भी आपत्ति दर्ज कराई है। मामले की सुनवाई 3 सितंबर 2026 को निर्धारित है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक भूमि आवंटन के लिए खसरा नंबर 672 की 7.689 हेक्टेयर और खसरा नंबर 161 की 0.4046 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख किया गया है।

आबादी के पास प्लांट लगाने पर ग्रामीणों की चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित बायोगैस प्लांट गांव और आसपास की बस्तियों के काफी नजदीक है। ऐसे में प्लांट शुरू होने के बाद दुर्गंध, वायु प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं पैदा होने की आशंका है।

ग्रामीणों ने दावा किया कि प्लांट में बाहर से गीला और बदबूदार कचरा लाकर उसका उपयोग किया जा सकता है। इससे आसपास के ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ-साथ कृषि और पशुधन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

ग्राम पंचायत की सहमति नहीं लेने का आरोप

ग्रामीणों ने भूमि आवंटन की प्रक्रिया पर एक और सवाल उठाया है। उनका दावा है कि बायोगैस प्लांट के लिए जमीन मांगने अथवा अनुमति से संबंधित कोई प्रस्ताव ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही पंचायत की ओर से इस संबंध में सहमति या प्रस्ताव लिया गया। इसी आधार पर ग्रामीणों ने प्रशासन से भूमि आवंटन की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

प्रशासन से आवंटन निरस्त करने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि कुराडबरी कृषि प्रधान क्षेत्र है और प्रस्तावित प्लांट आबादी के नजदीक होने के कारण स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जनसंख्या, पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और पशुधन को ध्यान में रखते हुए बायोगैस कंपनी के लिए प्रस्तावित शासकीय भूमि का आवंटन निरस्त किया जाए।

वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में जैव अपशिष्ट और कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण के लिए बायो-सीएनजी संयंत्रों को शासकीय भूमि उपलब्ध कराने की नीति संबंधी प्रावधान मौजूद हैं, जिसमें भूमि चयन के दौरान पहुंच मार्ग, कचरा स्रोतों की निकटता और आवश्यक बुनियादी ढांचे जैसे पहलुओं को ध्यान में रखने की बात कही गई है। फिलहाल ग्रामीणों की आपत्ति और प्रस्तावित भूमि आवंटन को लेकर आगे की प्रक्रिया न्यायालय और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।


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