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Mandsaur Collectorate: पोर्टल के पाप की सजा भुगत रहे मासूम! कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे पालक

Mandsaur Collectorate: पोर्टल के पाप की सजा भुगत रहे मासूम! कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे पालक

Mandsaur Collectorate: शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिला दिलाने के सरकारी दावों की हवा मंदसौर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में पूरी तरह से निकल गई। मंगलवार को जिला मुख्यालय पर एक बेहद ही मार्मिक और झकझोर देने वाला नजारा देखा गया, जब 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक की झुलसा देने वाली लू और भीषण गर्मी के बीच बेबस माता-पिता अपने छोटे-छोटे मासूम बच्चों को गोद में लेकर और सिर पर छाता ताने कलेक्ट्रेट की तपती जमीन पर धरने पर बैठ गए।

1 महीने से भटक रहे परिजन

पीड़ित पालकों के अनुसार, शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित आरटीई की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया में उनके बच्चों का चयन शहर के नामी निजी स्कूलों के लिए हुआ था। बाकायदा उनके मोबाइल पर चयन का आधिकारिक मैसेज भी आया। जब खुशकिस्मत माता-पिता अपने बच्चों की उंगली थामकर संबंधित निजी स्कूलों में दाखिला कराने पहुंचे, तो स्कूल संचालकों ने यह कहकर उन्हें भगा दिया कि हमारा स्कूल आरटीई (RTE) के दायरे में ही नहीं आता, हम एडमिशन नहीं देंगे। पिछले एक महीने से पीड़ित परिवार इस दफ्तर से उस दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं के चक्कर भी काटे, लेकिन जब सत्ता और संगठन से सिर्फ खोखले आश्वासन मिले, तो थक-हारकर आज सुबह 11 बजे ही वे बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठ गए।

मनाने पहुंचे अफसरों के छूटे पसीने

कड़कती धूप में मासूम बच्चों को धरने पर बैठा देख प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। दोपहर तक कलेक्ट्रेट के फर्श पर डटे बच्चों और परिजनों को समझाने और धरना समाप्त कराने के लिए एडीएम, एसडीएम और खुद जिला शिक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मिन्नतें कीं और आश्वासन दिया, लेकिन सिस्टम के झूठ से तंग आ चुके पालकों ने उठने से साफ इंकार कर दिया।

भावुक हुए पालक

धरने पर बैठे भावुक परिजनों ने रोते हुए कहा, एक महीने से हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अगले महीने यानी जून से नए सत्र के स्कूल शुरू हो जाएंगे। अगर पोर्टल की गलती की सजा हमारे बच्चों को मिली और एडमिशन नहीं हुआ, तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा और भविष्य अंधकार में चला जाएगा। जब तक लिखित और ठोस समाधान नहीं मिलता, हम बच्चों के साथ यहीं धूप में बैठे रहेंगे।

डीईओ की सफाई

इस पूरे प्रशासनिक और तकनीकी बवाल को लेकर जब जिला शिक्षा अधिकारी टेरेसा मिंज से तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने विभाग और पोर्टल की गलती को स्वीकार किया। डीईओ टेरेसा मिंज ने कहा कि आरटीई के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए स्कूलों के चयन में एक बड़ी तकनीकी त्रुटि हुई थी। इस गड़बड़ी के चलते जो निजी स्कूल आरटीई की पात्रता सूची या इसके दायरे में नहीं आते थे, पोर्टल ने उन्हें भी आरटीई मैपिंग में शामिल दिखा दिया। इसी वजह से सॉफ्टवेयर ने उन स्कूलों में बच्चों की सीटें आवंटित कर दीं। हम इस तकनीकी गड़बड़ी को सुधारने के लिए वरिष्ठ स्तर पर पत्राचार कर रहे हैं और जल्द ही इन बच्चों के एडमिशन के लिए वैकल्पिक और सही मार्ग तलाश कर समाधान निकाला जाएगा।


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